
विधानसभा चुनाव 2023 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने चौकाने वाला निर्णय किया है. बीजेपी ने चुनाव के ऐलान से पहले ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं. छत्तीसगढ़ में जिन 21 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए हैं, उनमें सबसे ज्यादा चर्चा दुर्ग जिले के पाटन सीट की हो रही है. क्योंकि पाटन से ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए हैं. भूपेश बघेल की सीट पर बीजेपी ने उनके ही पारिवारिक संबंधी रिश्ते में भतीजे विजय बघेल को प्रत्याशी बनाया है. हालांकि राजनीतिक लिहाज से विजय बघेल भूपेश बघेल के घोर विरोधी माने जाते हैं.
दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से सांसद विजय बघेल के कद का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए उनको छत्तीसगढ़ भाजपा के घोषणा पत्र समिति का संयोजक बनाया है. विजय बघेल का नाम छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित उन सांसदों में शामिल है, जो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सीधा निशाना बनाते हैं.
2019 में मिली थी सबसे बड़ी जीत
विजय बघेल पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा चर्चा में तब आए, जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गढ़ दुर्ग में लोकसभा चुनाव में राज्य में बीजेपी को सबसे बड़ी जीत मिली. बीजेपी प्रत्याशी विजय बघेल ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा चन्द्राकर को 3 लाख 88 हजार से अधिक वोंटों से हराया. प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल संसदीय क्षेत्र में से एक दुर्ग पर सबकी निगाहें टिकी थीं. क्योंकि तब माना जा रहा था कि दुर्ग से कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा राज्य सरकार की साख दांव पर लगी थी.
भूपेश बघेल को दे चुके हैं मात
सरल व मिलनसार स्वभाव के विजय बघेल सामाजिक तौर पर भी काफी मजबूत माने जाते हैं. कुर्मी समाज के साथ ही अन्य वर्गों में भी इनकी पकड़ है. बीकॉम तक की पढ़ाई करने वाले विजय बघेल का नम्मूलाल बघेल और सत्यभामा बघेल के बेटे हैं. 15 अगस्त 1959 को जन्मे विजय बघेल कबड्डी के राज्य स्तरीय खिलाड़ी रह चुके हैं. इन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर की टीम का प्रतिनिधित्व भी किया है. एक बार इन्हे रजत और एक बार स्वर्ण पदक मिला.
राजनीतिक सफर
साल 1985 से 2004 तक भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी रहे विजय बघेल ने साल 2000 में पहली बार नगर पालिका भिलाई-3 चरोदा के अध्यक्ष पद का निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते. इसके बाद साल 2003 के विधनसभा चुनाव में पाटन सीट से एनसीपी की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए. इसके बाद उन्होंने 2004 में बीजेपी की सदस्यता ली. रिश्ते में चाचा भूपेश बघेल के खिलाफ उन्होंने 2008 में बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते. इस कार्यकाला में वे राज्य सरकार में संसदीय सचिव भी रहे. इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में हार मिली.