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सिक्योरिटी गार्ड के हौसले बुलंद, 23 बार फेल होकर हासिल की MSc! पेश की मिसाल

राजकरन ने बताया कि इतनी बार फेल होने के बाद यह सब आसान नहीं था. ने ही उनके पास घर था और न ही उन्होंने शादी की थी. उनका कहना है कि मैंने तो अपने सपनों से ही शादी कर ली थी. उनकी बस एक चाहत थी कि वो गणित में ग्रेजुएट कहलाएं. बार-बार फेल होने के बाद भी उन्होंने अपना धैर्य को टूटने नहीं दिया. मानों हर बार फेल होने के बाद उन्होंने अपने इरादों और मज़बूत बनाया और अपने सपनों को पूरा किया.

November 29, 2023, 12:33
  • सिक्योरिटी गार्ड के हौसले बुलंद, 23 बार फेल होकर हासिल की MSc! पेश की मिसाल
    55 साल के राजकरण बरुआ पेशे से गार्ड (Security Guard) की नौकरी करते हैं और एक झोपड़ी में रहते हैं. इन्होंने 25 साल के दौरान लगातार फेल होते-होते हुए भी MSc Mathematics की डिग्री हासिल कर ली. इस सफलता के लिए राजकरण ने अपने जीवन में जितना कुछ कमाया वह सब कुछ पढ़ाई में ही लगा दिया. पढ़ाई के लिए अपनी कमाई से वे हर महीने 5000-7000 रुपये की फीस भरते रहे और किताबें खरीदते रहे.
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    25 साल की कड़ी मेहनत के बाद राजकरन को बड़ी कामयाबी हासिल हुई. MSC Prelims में राजकारण 23 बार असफल हुए. 2021 में आखिरकार उन्होंने MSC Prelims का एग्जाम पास कर लिया. उसके बाद एक ही बार में MSC फाइनल के एग्जाम को भी क्लियर कर लिया. राजकरन ने अपने सपनों को पूरा करने में ज़िंदगी के 25 साल लगा दिए. उनका कहना है कि उन्होंने ठान लिया था और अपने जूनून को कभी छोड़ा नहीं.
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    राजकरन ने बताया कि इतनी बार फेल होने के बाद यह सब आसान नहीं था. ने ही उनके पास घर था और न ही उन्होंने शादी की थी. उनका कहना है कि मैंने तो अपने सपनों से ही शादी कर ली थी. उनकी बस एक चाहत थी कि वो गणित में ग्रेजुएट कहलाएं. बार-बार फेल होने के बाद भी उन्होंने अपना धैर्य को टूटने नहीं दिया. मानों हर बार फेल होने के बाद उन्होंने अपने इरादों और मज़बूत बनाया और अपने सपनों को पूरा किया.
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    राजकरण ने सबसे पहले आर्कियोलॉजी (MA in Archeology) में एमए पास किया और संगीत की शिक्षा और डिग्री ली. उसके बाद एक स्कूल में पढाने के लिए जाने लगे तो इनके मैथ्स पढ़ाने के तरीके से प्रभावित होकर शिक्षकों ने सराहना की. तब उनके मन में गणित में एमएससी करने का विचार आ गया और उन्होंने साल 1996 में MSc दाखिला ले लिया. राजकरन आज कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गए हैं.
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    राजकरण बताते हैं कि बंगलों में काम करते हुए और झोपड़ी में रहते हुए उन्हें कई बार बेज्जती का सामना करना पड़ा. मालिक लोग तू-तड़ाक से बात किया करते थे. कुत्ते और बच्चों की पॉटी फेंकने, उल्टी साफ करने और गंदगी की सफाई जैसे काम उनसे कराए जाते थे. कई बार वह बेज्जती भी सहते थे. लेकिन राजकरण अपना काम सबकुछ सह कर करते रहे, क्योंकि उन्हें पढ़ाई करनी थी.
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