आज का युवा जानकारी के बोझ, पहचान के संकट, असफलता के भय और निरंतर तुलना की प्रवृत्ति के बीच जी रहा है. साधन बढ़े हैं, पर दिशा धुंधली हो गई है. मनोविज्ञान इसे जीवन के अर्थ के संकट के रूप में देखता है. ऐसे समय में छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन एक व्यावहारिक मार्ग दिखाता है. रायरेश्वर मंदिर में किशोर शिवाजी द्वारा लिया गया स्वराज्य का संकल्प केवल राजनीतिक विद्रोह नहीं था, बल्कि अपने जीवन को एक बड़े उद्देश्य से जोड़ने का निर्णय था. जब जीवन किसी उच्च लक्ष्य से जुड़ता है तो बिखरी हुई ऊर्जा एकाग्र हो जाती है. यही युवा मन की पहली आवश्यकता है – स्पष्ट ध्येय.
उपनिषदों में कहा गया है – “नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः”, अर्थात आत्मा दुर्बल को प्राप्त नहीं होती. आज का युवा अक्सर हीनभावना और असफलता के भय से जूझता है. शिवाजी महाराज ने छोटे-छोटे किलों से अपने अभियान की शुरुआत की. यह हमें सिखाता है कि आत्मविश्वास एक दिन में नहीं बनता, वह छोटी सफलताओं से विकसित होता है. बड़े लक्ष्य से घबराने के बजाय छोटे ठोस कदम उठाना ही आत्मबल का निर्माण करता है.
आज हमें पहचान और पद की इच्छा होती है. यह विचार हमें सबसे अधिक विचलित करता है क्योंकि आज युवा आधुनिक भी बनना चाहता है और अपनी जड़ों से कटना भी नहीं चाहता. शिवाजी महाराज ने अपनी भाषा, अपनी परंपरा और अपने समाज को शासन का आधार बनाया. उनका राज्याभिषेक सांस्कृतिक आत्मविश्वास का पुनर्जागरण था. इससे युवा सीख सकता है कि अपनी जड़ों से जुड़ना पिछड़ना नहीं, बल्कि स्थायी आत्मसम्मान प्राप्त करना है.
आज जब हमें हर क्षण लगता है कि संभवतः कुछ सुधर नहीं सकता या एक दिशा में बढ़ते हुए थक जाने पर हम नई दिशा की ओर आकर्षित होते हैं. हमें लगता है कि न्याय एक समान नहीं हो सकता. ऐसे में शिवाजी महाराज ने न्यायपूर्ण कर-व्यवस्था बनाई, किसानों को सुरक्षा दी और स्त्रियों के सम्मान को अटल नियम बनाया. यह बताता है कि परिवर्तन केवल विरोध से नहीं, नैतिक और वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी करने से आता है. यही रचनात्मक सक्रियता युवा शक्ति का सही रूप है.
इस प्रकार हिंदवी स्वराज्य केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि युवा मन के लिए जीवन-पद्धति है – स्पष्ट लक्ष्य, छोटे कदमों से आगे बढ़ने का आत्मविश्वास, चिंता पर विजय पाकर कर्म में उतरना, अपनी जड़ों से जुड़ना, नैतिक व्यवस्था का निर्माण करना और भीतर से स्वतंत्र होना. जब भक्ति कर्म बनती है, धर्म नैतिकता बनता है और शक्ति सेवा बनती है, तभी सच्चा स्वराज्य जन्म लेता है. यही शिवाजी महाराज का शाश्वत संदेश है और यही आज के युवा की सबसे बड़ी आवश्यकता.
डॉ. अनन्या मिश्र, लेखिका, कम्युनिकेशन एवं ब्रांडिंग सलाहकार
डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं.