मध्य प्रदेश के उज्जैन में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. भीषण गर्मी से आम जनजीवन प्रभावित हो गया है. वहीं 42°C का असर भगवान पर दिखने लगा है. भगवान की सेवा का तरीका भी बदलना पड़ रहा है. यहां देवी देवताओं को गर्मी से बचाने के लिए मलय पर्वत (उड़ीसा) के चंदन का लेप, शीतल भोग लगाकर मंदिरों में ठंडक के विशेष उपाय किए जा रहे हैं.
भीषण गर्मी को देखते हुए भरतपुरी स्थित प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा को ठंडक देने के लिए एर कंडीशन के साथ उड़ीसा के मलय पर्वत से लाए गए चंदन का लेप लगाया जा रहा है. पंडित राघव दास के मुताबिक, भगवान प्रेम का स्वरूप हैं और उसी भाव से उनकी सेवा की जाती है. रोजाना चार सेवक करीब 30 किलो चंदन तैयार कर रहे हैं, जिससे भगवान को भीषण गर्मी में शीतलता मिल सके. कुल मिलाकर जहां एक ओर लोग गर्मी से राहत के उपाय ढूंढ रहे हैं, वहीं मंदिरों में भगवान की सेवा भी मौसम के अनुसार की जा रही है.
भगवान को ठंडा भोग
मंगलनाथ रोड स्थित सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण,बलराम, सुदामा को रोजाना दही, छाछ, श्रीखंड, तरबूज, आम और ठंडे पेय पदार्थों का भोग लगाया जा रहा है. पुजारी परिवार के अनुसार, यह प्रसाद श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि को समर्पित होता है. साथ ही चंदन का लेप भी लगाया जा रहा है. वहीं गोपाल मंदिर में चंदन में केसर और कपूर मिलाकर लेप लगाने के साथ भोग में केरी पना, लस्सी और छाछ जैसे शीतल व्यंजन अर्पित किए जा रहे हैं.
महाकाल में सतत जल धारा
बता दें कि विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर में बाबा को गर्मी से राहत के लिए विशेष परंपरा निभाई जाती है. यहां गर्भगृह में शिवलिंग पर 11 मटकियां (गलंतिया) बांधी गई हैं. 11 पवित्र नदियों के नाम से बांधी गई इन मटकियों में जल भरा जाता है, जिससे सतत शिवलिंग पर जलधारा बहती है. परंपरानुसार इस वर्ष भी वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से इसे विधिवत शुरू किया है. मान्यता है कि इससे भगवान के साथ भक्तों को भी शीतलता और कृपा मिलती है.
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