Ujjain News: मध्यप्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां घर में रखे गेहूं में डाले गए कीटनाशक से निकली जहरीली गैस ने पांच मासूम बच्चों की जिंदगी को संकट में डाल दिया. इस हृदयविदारक हादसे में दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है. बाकी दो बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. यह हादसा उस समय हुआ, जब ननिहाल आए बच्चे एक बंद कमरे में सो रहे थे. सोते‑सोते ही बच्चों को ज़हर ने अपनी चपेट में ले लिया. इस घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है.
गर्मी की छुट्टियों में ननिहाल आए थे बच्चे
हादसा उज्जैन के इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स क्षेत्र का है. ईंटभट्टा संचालक लालचंद प्रजापति की बेटी पूजा शाजापुर से अपने मायके आई थी. वह अपनी पांच साल की बेटी जेनिशा और डेढ़ माह की मासूम त्रिशा को साथ लेकर आई थी. वहीं पूजा की बहन रीना भी अपने साढ़े तीन माह के बेटे रेहान और चार साल की बेटी अन्नू उर्फ अनिका के साथ गर्मियों की छुट्टियां मनाने मायके पहुंची थी.
Ujjain Kids Death: उज्जैन गेहूं जहरीली गैस हादसा
एक ही कमरे में सो रहे थे सभी मासूम
सोमवार रात पूजा और रीना के बच्चों के साथ उनके भाई नीतेश की तीन साल की बेटी येशु भी घर के पीछे वाले कमरे में सो रही थी. इसी कमरे में बच्चों की मां भी मौजूद थी. समस्या यह थी कि इसी कमरे में करीब चार क्विंटल गेहूं रखा हुआ था, जिसे सुरक्षित रखने के लिए उसमें कीटनाशक डाला गया था. बंद कमरे और खराब वेंटिलेशन के चलते जहरीली गैस बनती रही, जिसका असर धीरे‑धीरे पूरे कमरे में फैलता चला गया.
सुबह बच्चों की हालत देख उड़े होश
मंगलवार सुबह करीब 9 बजे जब बच्चे नींद से उठे, तो सभी की हालत बिगड़ी हुई नजर आई. सबसे पहले डेढ़ माह की त्रिशा के मुंह से झाग निकलता दिखा. परिजन घबरा गए और तत्काल बच्चों को निजी अस्पताल लेकर पहुंचे. इलाज के दौरान शाम करीब 4 बजे त्रिशा ने दम तोड़ दिया. इसी बीच रीना की चार साल की बेटी अनिका की हालत भी गंभीर होती गई और बुधवार सुबह उसकी भी मौत हो गई.
एक बच्ची इंदौर रेफर, दो का इलाज जारी
हादसे में गंभीर रूप से प्रभावित पांच साल की जेनिशा को बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. वहीं साढ़े तीन माह के रेहान और तीन साल की येशु का उज्जैन में इलाज जारी है. डॉक्टरों की निगरानी में दोनों बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गेहूं को खराब होने से बचाने के लिए डाली गई कीटनाशक दवा से बंद कमरे में जहरीली गैस बनी. रातभर यह गैस कमरे में फैलती रही और मासूम बच्चे सोते‑सोते उसकी चपेट में आ गए. घटना के बाद घर में मातम का माहौल है. बच्चों की नानी कलाबाई खुद को कोसती नजर आईं. उनका कहना है कि वे हर साल इसी तरह दवा डालकर गेहूं सुरक्षित रखते थे और कभी ऐसा हादसा नहीं हुआ.
डॉक्टर ने क्या कहा?
डॉक्टर जितेंद्र शर्मा के अनुसार, गेहूं में डाली जाने वाली कीटनाशक दवाओं से जहरीली गैस बनती है. यदि कमरा बंद हो और वेंटिलेशन नहीं हो, तो दम घुटने जैसी स्थिति बन सकती है. छोटे बच्चों में इसका असर बेहद घातक होता है. इधर नानाखेड़ा पुलिस ने मर्ग कायम कर एफएसएल टीम से जांच करवाई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का खुलासा होगा.
ये सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अनाज को सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के बजाय नीम जैसे प्राकृतिक उपाय अपनाने चाहिए, खासकर जब घर में छोटे बच्चे हों. बंद कमरों में ऐसे रसायनों का उपयोग जानलेवा साबित हो सकता है.
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