Bulldozer Action on Sulabh Complex: सुलभ कॉम्प्लेक्स ध्वस्त; सार्वजनिक शौचालय पर एक्शन के बाद उठे ये सवाल

Sulabh Complex Demolished in Vidisha: साल 2021 में संजीवनी स्वच्छता सेवा संस्थान समिति, भोपाल और विदिशा नगर पालिका के बीच 15 वर्षों का एग्रीमेंट हुआ था. इसके तहत बस स्टैंड परिसर और नगर पालिका गेट के पास बने सुलभ शौचालयों का संचालन संस्था कर रही थी. लेकिन 2025 में बस स्टैंड स्थित शौचालय को अचानक तोड़ दिया गया. अब ये सवाल उठ रहे हैं.

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Bulldozer Action on Sulabh Complex: सुलभ कॉम्प्लेक्स ध्वस्त; सार्वजनिक शौचालय पर एक्शन के बाद उठे ये सवाल

Sulabh Complex Demolished in Vidisha: विदिशा शहर (Vidisha) में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. जिस सुलभ शौचालय (Sulabh Complex) को 15 साल तक संचालन के लिए संस्था को सौंपा गया था, उसे महज 5 साल में ही तोड़ दिया गया. इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नियमों के तहत हुआ या एग्रीमेंट की शर्तों की अनदेखी वहीं संजीवनी स्वच्छता सेवा संस्थान का कहना है कि बिना नोटिस, बिना चेतावनी और बिना सुनवाई के बस स्टैंड परिसर स्थित सुलभ शौचालय को जमींदोज कर दिया गया.

Bulldozer Action: सुलभ शौचालय पर चला बुलडोजर

सेवा संस्थान का क्या आरोप है?

संजीवनी स्वच्छता सेवा संस्थान के सुपरवाइजर गोपाल कुमार ने NDTV से कहा कि “15 साल का एग्रीमेंट था, लेकिन बिना नोटिस शौचालय तोड़ दिया गया. अगर पहले सूचना दी जाती तो हम अपना पक्ष रखते. हमने इस पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर से की है.”

नगर पालिका का तर्क

दूसरी ओर विदिशा नगर पालिका का कहना है कि जनहित में यह फैसला जरूरी था. CMO दुर्गेश सिंह ने बताया कि “बस स्टैंड परिसर में हमारा सार्वजनिक शौचालय था. संस्था द्वारा संचालन किया जा रहा था, लेकिन बार-बार शिकायतें आ रही थीं कि शौचालय जर्जर हो चुका है. पीआईसी में प्रस्ताव पास कर अब सीआर फंड से हाईटेक शौचालय निर्माण का काम शुरू किया जा रहा है.”

Bulldozer Action: सुलभ शौचालय पर कार्रवाई

क्या है मामला?

साल 2021 में संजीवनी स्वच्छता सेवा संस्थान समिति, भोपाल और विदिशा नगर पालिका के बीच 15 वर्षों का एग्रीमेंट हुआ था. इसके तहत बस स्टैंड परिसर और नगर पालिका गेट के पास बने सुलभ शौचालयों का संचालन संस्था कर रही थी. लेकिन 2025 में बस स्टैंड स्थित शौचालय को अचानक तोड़ दिया गया.

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अब उठ रहे हैं ये सवाल

अब विदिशा में इस एक्शन के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर शौचालय जर्जर था, तो क्या नोटिस देना जरूरी नहीं था? और अगर एग्रीमेंट 15 साल का था, तो उसे 5 साल में तोड़ने की प्रक्रिया क्या नियमों के तहत पूरी की गई? एक तरफ संस्था न्याय की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ नगर पालिका जनहित का हवाला दे रही है. अब निगाहें कलेक्टर अंशुल गुप्ता के फैसले पर टिकी हैं, क्या यह कार्रवाई नियमों के तहत सही थी या एग्रीमेंट की शर्तों की अनदेखी?

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