सिंगरौली के पिपरझापी गांव का रहने वाला अमित कुमार तिवारी अब पुलिस गिरफ्त में है. आरोप है कि उसने जबलपुर हाईकोर्ट की फर्जी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल की और कोर्ट के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां भी कीं. हाईकोर्ट ने खुद इस मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया.
वीडियो में हाईकोर्ट की कथित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग दिखाई गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि यह वीडियो वास्तविक नहीं थी.
जबलपुर में दर्ज हुआ मामला
आरोपी की पहचान सिंगरौली जिले के पिपरझापी निवासी अमित कुमार तिवारी (26) के रूप में हुई है. आरोपी फर्जी वीडियो को फेसबुक और एक्स पर पोस्ट किया था. 6 जुलाई को हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान लेने के बाद जबलपुर के सिविल लाइन थाने में केस भी दर्ज किया गया और मामला सिंगरौली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया.
जांच में आरोपी को लेकर हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को सुप्रीम कोर्ट का लीगल एडवाइजर बताता था और सोशल मीडिया पर इसी पहचान का इस्तेमाल करता था. पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ाने के उद्देश्य से वीडियो तैयार कर वायरल की थी. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वीडियो बनाने में इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए हैं.
डिजिटल फॉरेंसिक जांच से पुलिस की साइबर क्राइम टीम पता कर रही है कि वीडियो आरोपी ने कैसे तैयार किया और उसके साथ में क्या कोई और भी शामिल है.
क्या बोले एसपी सिंगरौली?
सिंगरौली पुलिस अधीक्षक सियाज केएम ने बताया कि जबलपुर हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच की गई. जांच में सामने आए तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. एसपी ने कहा कि आरोपी के कब्जे से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं और उनकी तकनीकी जांच कराई जा रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो तैयार करने और प्रसारित करने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी.