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This Article is From Jan 24, 2026

माघ मेले में संतों को गंगा स्नान से रोकने पर भड़के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, बोले- 'व्यवहार अत्यंत निंदनीय'

Narsinghpur News: 'कौन शंकराचार्य है, यह प्रशासन तय नहीं करेगा...' माघ मेले में संतों को गंगा स्नान से रोकने पर भड़के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, बोले- 'व्यवहार अत्यंत निंदनीय' शनिवार को शंकराचार्य सदानंद सरस्वती मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर पहुंचे और मुक्तानंद संस्कृत पाठशाला के जीर्णोद्धार समारोह में शामिल हुए.

माघ मेले में संतों को गंगा स्नान से रोकने पर भड़के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती, बोले- 'व्यवहार अत्यंत निंदनीय'

Muktananda Sanskrit School: द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज (Shankaracharya Swami Sadananda Saraswati Maharaj) आज नरसिंहपुर पहुंचे और मुक्तानंद संस्कृत पाठशाला (Muktananda Sanskrit School) के जीर्णोद्धार समारोह में शामिल हुए. इस कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शृंगेरी पीठ में विधिवत अभिषेक हो चुका है. शृंगेरी के जगद्गुरु शंकराचार्य भारती तीर्थ जी महाराज द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और बाद में उनके उत्तराधिकारी महा सन्निधानम विदुषेकर भारती जी महाराज ने भी विधिवत अभिषेक संपन्न कराया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वो स्वयं उस अभिषेक समारोह में उपस्थित थे.

'कौन शंकराचार्य है, यह प्रशासन तय नहीं करेगा...' 

उन्होंने कहा कि यह तय करना कि कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं, किसी प्रशासन का अधिकार नहीं है. शंकर परंपरा गुरु-शिष्य पर आधारित है और उसी परंपरा के अनुसार संन्यास और अभिषेक की प्रक्रिया होती है. हमारे गुरुजी ने केवल दो ब्रह्मचारियों को संन्यास दिया है- एक हम स्वयं और दूसरे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती. ऐसे में प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती.

संतों को गंगा स्नान से रोकने पर भड़के

माघ मेले में हुए घटनाक्रम पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने कहा कि ब्राह्मण बालकों और साधु-संतों के साथ इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत निंदनीय है. गंगा स्नान करने से किसी को रोका नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, सत्ता आती-जाती रहती है, इसलिए सत्ता के अभिमान में ऐसे कार्य नहीं होने चाहिए, जिनकी समाज निंदा करे.

उन्होंने आगे कहा कि पहले राजतंत्र में राजा का बेटा राजा बनता था, लेकिन आज जनता मतदान के माध्यम से अपने प्रतिनिधि चुनती है. ऐसे में चुने हुए जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वो प्रजा की इच्छा का सम्मान करें. कोई भी सरकार या शासक देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, बल्कि उसका संरक्षण और पोषण करना उसका दायित्व है. शंकराचार्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि धार्मिक परंपराओं, साधु-संतों और सनातन संस्कृति का सम्मान करना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है और माघ मेले में हुई घटना को इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए.

संस्कृत, वैदिक, योग और आयुर्वेद की शिक्षा एक साथ दी जाएगी

इस खास मौके पर प्रदेश के परिवहन व स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद रहे. स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में संस्कृत, वैदिक, योग और आयुर्वेद की शिक्षा एक साथ दी जा सके, इसके लिए सरकार व्यवस्था कर रही है. राजगढ़ से इसकी शुरुआत की जा चुकी है और मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के गाडरवारा में भी इसकी नींव रखी गई है. जल्द ही पूरे मध्य प्रदेश में यह व्यवस्था लागू हो सके इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है.

जल्द पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा रामायण-गीता-महाभारत

उन्होंने कहा कि रामायण, गीता, महाभारत आदि को भी प्राथमिक शिक्षा में विशेष पाठ्यक्रम में जोड़ने का प्रयास है... ताकि बच्चे हिंदू संस्कृति और सनातन को जान सके. भगवान परशुराम जी को पाठ के रूप में जोड़ा गया है.

उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैकाले की शिक्षा नीति को बदलने का प्रयास किया जा रहा है.. जिसके लिए कई व्यवस्थाओं को ध्यान में रखा जाना जरूरी है. वर्ष 2028-29 तक नई शिक्षा नीति लागू करना है, जिसमें स्थानीय स्तर के भाषा, संस्कृति, धर्म आदि सभी को समाहित करना है, ताकि हिन्दू और सनातन संस्कृति को बच्चे जान सके.

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