सीहोर: मध्य प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव किया गया है. इसे ऑनलाइन क फार्मर आईडी के साथ जोड़ दिया गया है. किसान अब सीधे दुकानों से खाद नहीं ले सकेंगे. उन्हें ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी. लेकिन, ई-टोकन खाद वितरण व्यवस्था का जिले में किसान विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम में कई प्रकार की खामियां हैं, फार्मर आईडी की बाध्यता कर दी गई है, जबकि अधिकांश किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है.
दरअसल, अधिकांश किसान अपनी गेहूं उपज खरीदी केंद्रों व मंडियों में बेच चुके हैं, अब वे खरीफ फसलों के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं. पहली बारिश में किसान बोनी कर देंगे. इसके बाद उन्हें खाद की जरूरत होगी. जबकि इस बार प्रदेश भर में ई-टोकन खाद वितरण प्रणाली लागू कर दी गई है. इस व्यवस्था में फार्मर आईडी की बाध्यता से किसान चिंतित हैं. उनका कहना है कि किसानों के खसरा से आधार लिंक नहीं है. खातों की केवाईसी नहीं है, पहले सरकार किसानों की आईडी बनाकर दे इसके बाद योजना लागू करे. एकदम से कोई भी नई व्यवस्था थोपना गलत है, इससे नुकसान होता है.
1 लाख 45 हजार में से सिर्फ 13,445 किसानों के पास आईडी
सर्वर डाउन की रहती है समस्या
इस व्यवस्था की तकनीकी खामियां भी सामने आ रही हैं, वेबसाइट में सर्वर डाउन के कारण खाद बुक नहीं हो पा रही है. किसानों का कहना है कि पर्ची जनरेट होने के बाद भी सोसायटी में खाद नहीं मिल रही. पर्ची कटाने के बाद तारीख दी जाती है, जब उस तारीख में खाद नहीं मिलती है तो पर्ची का समय समाप्त हो जाता है.