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MP में मौत पर भी मुनाफा! संबल योजना के नाम पर गरीबों से कथित लूट, मऊगंज में बड़ा खुलासा

मध्यप्रदेश सरकार की Sambal Yojana के तहत मिलने वाली सहायता राशि में गड़बड़ी के आरोप, मऊगंज में गरीब परिवारों से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया. 

MP में मौत पर भी मुनाफा! संबल योजना के नाम पर गरीबों से कथित लूट, मऊगंज में बड़ा खुलासा

Sambal Yojana: मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सरकार की गरीब हितैषी मुख्यमंत्री संबल योजना को ही कुछ लोगों ने कमाई का जरिया बना लिया है. आरोप है कि इस योजना के नाम पर गरीब श्रमिक परिवारों से पैसे ऐंठे जा रहे हैं और मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि में भारी गड़बड़ी की जा रही है.

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल 2.0) योजना के तहत पंजीकृत असंगठित श्रमिकों की मृत्यु पर उनके परिवारों को मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि में अजब गजब खेल खेला जा रहा है. सामान्य मृत्यु पर 2 लाख तो दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख की सहायता के साथ अंत्येष्टि सहायता जो अंतिम संस्कार के लिए 5000 की राशि पर अब दलालों को नजर उसे डकारने में लग गई है. 

sambal yojana scam mauganj mp

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खेल भी ऐसा की विभागों के ऑपरेटर और गांव में दलालों के मार्फत सांठगांठ बनाकर अब मौत पर मिलने वाली शासन की योजना की राशि हड़प ली जाती है जिसका उदाहरण मऊगंज जिले के हनुमना जनपद के देवरा गांव अंतर्गत दर्जनों मामले निकलकर सामने आए है.

मामला मऊगंज जिले के हनुमना जनपद के ग्राम देवरा का है, जहां पीड़ित ने आरोप लगाया है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे आधार कार्ड, पासबुक, चेक और फोटो लिए गए. बाद में उनके खातों में सरकार की तरफ से राशि तो आई, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा कथित रूप से हड़प लिया गया. कई ऐसे लोग हैं जिनकी मृत्यु के बाद संबल कार्ड बनाकर फर्जीवाड़ा कर राशि का बंदरबाट किया जाता है. 

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जब गांव में किसी की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो सबसे पहले यही दलाल सक्रिय हो जाते है. फिर यहीं से शुरू होता है पूरा खेल. बाकायदे उनसे आधार कार्ड और समग्र आईडी लेकर जांच पड़ताल की जाती है. यदि मृतक का पंजीयन संबल योजना में दिखाई देता है तो उनको यह बोलकर विश्वास में लिया जाता है कि सरकारी योजना से कुछ मदद दिलवा देंगे. ऑपरेटर से संपर्क कर आगे की प्रक्रिया करने के बाद मृतक के परिजनों को बैंक से पैसा निकलवाया जाता है और उसी में कुछ हिस्सा देकर पूरी राशि हड़प ली जाती है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बहुत से ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिसमें यदि कोई मृतक संबल में पंजीयन नहीं भी है, तो दलालों के माध्यम से ऑपरेटर से सांठगांठ करते हुए मृत्यु होने के बाद पहले संबल योजना में पंजीकृत किया जाता है और मिलने वाली सहायता राशि का बंदरबांट किया जाता है. जब तक हितग्राही को ये मालूम चलता है कि यह शासन की योजना से मिलने वाला पैसा हमारा था तब तक पूरा खेल संपन्न हो जाता है. 

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कैसे आया मामला सामने?

पीड़ित रमेश विश्वकर्मा के मुताबिक उनकी पत्नी के निधन के बाद मिलने वाली 4 लाख रुपये की सहायता राशि में से 2 लाख रुपये चेक के जरिए निकाल लिए गए. आरोप है कि यह रकम स्थानीय व्यक्ति द्वारा अपने खाते में ट्रांसफर करवाई गई. जब इस मामले में राशि लेने वाले संबंधित लोगों से बात की गई, तो उसने कथित तौर पर दावा किया कि इस राशि का हिस्सा सरपंच, सचिव और जनपद स्तर तक देना पड़ता है. यह बयान पूरे मामले को और गंभीर बना देता है, जिससे संगठित भ्रष्टाचार की आशंका गहरा गई है. 

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हितग्राहियों का कहना है कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं, बल्कि एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है जिसमें पक्ष और विपक्ष से जुड़े लोग शामिल है जो इनके बचाव का प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन ये गिरोह उनको निशाना बनाता है जो गरीब अशिक्षित है. सबसे बड़ी बात इस पूरे मामले की शिकायत जनपद और स्थानीय पुलिस चौकी में की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. पीड़ित रमेश विश्वकर्मा, शैलेन्द्र गिरी सहित कई हितग्राही कलेक्टर जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे. हितग्राहियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर न्याय नहीं होता तो वे आत्महत्या करेंगे. 

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ज‍िला प्रशासन ने दिए जांच के सख्त आदेश

मऊगंज जिला कलेक्टर संजय जैन ने संज्ञान लेते हुए हनुमना सीईओ सुरभि श्रीवास्तव को जांच करने के आदेश दिए हैं. साथ ही कार्रवाई की बात भी कही है. हालांकि हनुमना जनपद की सीईओ सुरभि श्रीवास्तव ने बताया कि एक हफ्ते पहले भी ऐसा मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच समिति गठित की गई है और जांच जारी है. उन्होंने कहा कि आरोपी चाहे जो हो, कठोर कार्रवाई की जाएगी.

अब सवाल यह है कि क्या जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? मऊगंज को नए जिले के रूप में सौगात भले ही मिल गई हो, लेकिन भ्रष्टाचार के मामले कम नहीं हो रहे. अवैध उत्खनन हो या फिर सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी, शिकायतों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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