Success Story: गरीबी से सफलता तक... पाई-पाई को मोहताज, मां ने पैसे उधार लेकर खेलने भेजा, बेटी ने जीता गोल्ड मेडल, जानें प्रेरणादायक कहानी

Gold Medal Winner Nidhi Sen:सागर की 16 वर्षीय निधि सेन ने कमला नेशनल जूनियर गोल्फ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर बुंदेलखंड का मान बढ़ाया है. निधि की मां ने कर्ज लेकर बेटी को टूर्नामेंट में भेजा था, जहां उसने महाराष्ट्र और गुजरात की टीमों को हराकर इतिहास रच दिया.

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Golfer Nidhi Sen Success Story: अगर इरादे फौलादी हों, तो अभावों की दीवार भी रास्ता नहीं रोक सकती... इस कहावत को सागर की 16 वर्षीय निधि सेन ने सच कर दिखाया है. गरीबी को मात देकर निधि सेन ने गोल्फ खेल में ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिससे पूरे मध्य प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है.

कमला नेशनल जूनियर गोल्फ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर निधि ने न केवल सागर, बल्कि पूरे बुंदेलखंड का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है.

निधि की यह जीत महज एक पदक नहीं, बल्कि उन तानों और आर्थिक तंगहाली के खिलाफ एक बड़ी जीत है, जो कभी उनके सपनों के आड़े आ रहे थे.

पढ़ाई में कमजोर, लेकिन इरादों में अव्वल 

निधि की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. आर्मी पब्लिक स्कूल में 11वीं की छात्रा निधि बचपन से पढ़ाई में औसत रहीं, जिसके कारण उन्हें अक्सर घर-परिवार में ताने सुनने पड़ते थे. रिटायर्ड फौजी पिता के घर में अनुशासन तो था, लेकिन संसाधनों की अपनी सीमाएं थीं. पढ़ाई में मन न लगाने वाली निधि के भीतर खेलों को लेकर एक अलग ही जुनून था. उन्होंने अपने स्कूल के कोच के मार्गदर्शन में गोल्फ की ट्रेनिंग शुरू की, जो आमतौर पर एक महंगा खेल माना जाता है.

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मां के त्याग और कर्ज से मिली हिम्मत 

इस सफलता के पीछे निधि की मां का वो संघर्ष है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें भर आएं.

निधि के पिता की पेंशन से परिवार का गुजारा होता है, ऐसे में गोल्फ जैसे खेल का खर्च उठाना नामुमकिन जैसा था. पिछले साल पैसों की कमी के कारण निधि फाइनल मुकाबला नहीं खेल पाई थीं. लेकिन इस बार मां ने हार नहीं मानी.

बेटी को टूर्नामेंट में भेजने के लिए उन्होंने लोगों से उधार पैसे लिए, ताकि निधि का सपना पैसों की कमी की भेंट न चढ़ जाए. मां का यही भरोसा निधि के लिए मैदान पर सबसे बड़ी ताकत बन गया.

जो कभी देते थे ताने, वो आज स्वागत में बिछाए पलकें

तैयारी और जज्बा ऐसा था कि निधि ने फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र और गुजरात जैसी मजबूत टीमों की खिलाड़ियों को कड़ी शिकस्त दी. अपनी सटीक तकनीक और एकाग्रता के दम पर उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया. तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी निधि ने दिखा दिया कि बुंदेलखंड की मिट्टी में कितनी प्रतिभा छिपी है. आज जब वह मेडल पहनकर लौटी हैं, तो वही लोग जो कभी ताने देते थे, उनके स्वागत में पलकें बिछाए खड़े हैं.

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सफलता... न वह गरीबी देखती है  न अमीरी

निधि अब रुकना नहीं चाहतीं. उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने का है. उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल बन गई है, जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं. निधि की कहानी सिखाती है कि यदि परिवार का साथ और खुद पर अटूट विश्वास हो, तो गोल्फ के मैदान में भी आसमान छुआ जा सकता है.

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