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तीन करोड़ रुपये का राशन घोटाला, 12 दुकानों के प्रबंधक, विक्रेता व सहायक विक्रेता के खिलाफ FIR

Rashan Scam: जांच के दौरान सामने आया था कि दुकानों से 4897 क्विंटल गेहूं, 4132 क्विंटल चावल, 44 क्विंटल नमक और 28 क्विंटल शक्कर स्टॉक से गायब हैं. यह खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को वितरित किया जाना था. आरोप सही पाए जाने पर एसडीएम ने 22 फरवरी को 26 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दुकानों को निलंबित कर वसूली की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई थी. इसके बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. 

तीन करोड़ रुपये का राशन घोटाला, 12 दुकानों के प्रबंधक, विक्रेता व सहायक विक्रेता के खिलाफ FIR
तीन करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले के मामले में आखिरकार कार्रवाई शुरू हो गई है
Gyan Shukla

मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा विकासखंड की राशन दुकानों में सामने आए करीब तीन करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले के मामले में आखिरकार कार्रवाई शुरू हो गई है. पुलिस ने 12 उचित मूल्य दुकानों के प्रबंधक, विक्रेता और सहायक विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत एफआईआर दर्ज की है. उचेहरा थाना में सभी आरोपियों के विरुद्ध अलग-अलग 12 मामले दर्ज किए गए हैं. 

बताया गया है कि सीएम हेल्पलाइन में की गई शिकायतों के आधार पर एसडीएम उचेहरा की ओर से जांच कराई गई थी. जांच में कुल 26 उचित मूल्य दुकानों में भारी अनियमितताएं पाई गईं. जांच दल को दुकानों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर मिला. जांच में करीब 3 करोड़ 1 लाख 68 हजार 884 रुपये का खाद्यान्न गायब पाया गया. 

बड़े पैमाने पर अनाज की कालाबाजारी

दरअसल, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दुकानों से 4897 क्विंटल गेहूं, 4132 क्विंटल चावल, 44 क्विंटल नमक और 28 क्विंटल शक्कर स्टॉक से गायब हैं. यह खाद्यान्न सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को वितरित किया जाना था. आरोप सही पाए जाने पर एसडीएम ने 22 फरवरी को 26 दुकानदारों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए दुकानों को निलंबित कर वसूली की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई थी. इसके बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. 

इन दुकानों से गायब मिला राशन

जांच में उचेहरा ब्लॉक की 26 दुकानों में गड़बड़ी सामने आई. इनमें इटमा खोखर्रा से 7.09 लाख, पथरहटा से 9.09 लाख, नरहटी से 1.58 लाख, नरहटी रगला से 6.98 लाख, करही कला से 4.84 लाख, पोड़ी गरादा से 2.81 लाख, करही खुर्द से 3.33 लाख, बांधी मौहार से 10.96 लाख, इचौल से 5.39 लाख, आलमपुर से 21.12 लाख, पिपरिया से 19.99 लाख, परसमनिया से 20.95 लाख, पटिहट से 20.75 लाख, रामपुर पाठा से 15.23 लाख, गढ़ौत से 19.84 लाख, तिघरा से 7.16 लाख, बाबूपुर से 7.97 लाख, बरा गढ़ौली से 1.70 लाख, पिथौराबाद से 13.72 लाख, पोड़ी से 27.51 लाख, पिपरी कला से 7.32 लाख, अटरा से 13.58 लाख, नंदहा से 8.83 लाख, तोषगांव से 21.38 लाख, धनेह से 12.88 लाख और मानिकपुर से 9.56 लाख रुपये के खाद्यान्न की गड़बड़ी सामने आई है.

ग्रामीणों ने किया था जल सत्याग्रह

गौरतलब है कि तीन महीने तक राशन न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने धनेह में होली के दौरान जल सत्याग्रह किया था. आंदोलन की सूचना मिलने पर जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह, एसडीएम सुमेश द्विवेदी और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी रविकांत शर्मा सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे थे. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण कोटेदारों पर कार्रवाई और राशन वितरण की मांग पर अड़े रहे. आंदोलन के बाद प्रशासन ने मामले में सख्त कदम उठाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है. 

इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मामला

पोड़ी में 27.51 लाख रुपये के राशन गबन के मामले में विक्रेता रविकरण सिंह और प्रबंधक सुरेन्द्र सिंह गोंड के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया. पिथौराबाद में 13.72 लाख रुपये के गबन के मामले में विक्रेता शुभम वर्मन और प्रबंधक अजय सिंह पटेल, अटरा में 13.58 लाख रुपये के मामले में सहायक विक्रेता रवि करण सिंह, सहायक विक्रेता शुभम वर्मन और प्रबंधक सुरेंद्र सिंह गोंड पर मामला दर्ज हुआ. इसी तरह नंदहा में विक्रेता रविकरण सिंह, सहायक विक्रेता लवकेश सिंह और प्रबंधक सुरेंद्र सिंह, आलमपुर में विक्रेता दरोग सिंह, सहायक विक्रेता रामानुज यादव और प्रबंधक सुरेन्द्र सिंह, परसमनिया में विक्रेता उदयराज सिंह, सहायक विक्रेता रज्जन चौधरी और प्रबंधक सुरेंद्र सिंह, पटिहट में प्रबंधक सुरेन्द्र सिंह, सज्जन चौधरी और सहायक विक्रेता गुलाब सिंह, रामपुर पाठा में प्रबंधक सुरेन्द्र सिंह और सहायक विक्रेता दिलीप सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है. 

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इसके अलावा गढ़ौत में सहायक विक्रेता दिलीप सिंह, प्रबंधक सुरेंद्र सिंह और विक्रेता सज्जन चौधरी, तुषगंवा में विक्रेता रामानुज यादव, प्रबंधक सुरेन्द्र सिंह और सहायक विक्रेता दरोग सिंह, पिपरिया में सहायक विक्रेता दरोगा सिंह, प्रबंधक सुरेंद्र सिंह और विक्रेता रामानुज यादव तथा धनेह में विक्रेता रावेन्द्र सिंह, सहायक विक्रेता लवकेश प्रताप सिंह और प्रबंधक अजय सिंह पटेल के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995 की धारा 3 और 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है.

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