रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है, लेकिन खंडवा जिला जेल में इस बार एक भावुक तस्वीर देखने को मिली. अपने मामा की रिहाई की कामना लेकर एक भांजी राखी और लड्डू गोपाल को साथ लेकर जेल पहुंची. उसकी इच्छा थी कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय और बंधनों पर विजय पाई, वैसे ही उसके मामा को भी जल्द आजादी मिले और वे परिवार के बीच लौट सकें. भांजी की इस भावनात्मक अपील ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया.
मामा के लिए राखी और रिहाई की प्रार्थना
जेल पहुंची भांजी पूजा पाठक ने अपने मामा के लिए राखी लेकर आई थी. उसके हाथों में लड्डू गोपाल की मूर्ति भी थी. पूजा ने कहा कि वह भगवान श्रीकृष्ण में आस्था रखती है और प्रार्थना करती है कि उसके मामा को भी जल्द राहत मिले. उसने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वह अपने परिवार के लिए न्याय और खुशियों की कामना लेकर यहां आई है. रक्षाबंधन के इस मौके पर उसकी सबसे बड़ी इच्छा अपने मामा को परिवार के साथ देखना है.
भावुक कर देने वाला रहा यह पल
जेल परिसर में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य काफी भावुक करने वाला था. राखी का त्योहार जहां रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देता है, वहीं भांजी की अपने मामा के प्रति चिंता और स्नेह ने सभी का ध्यान खींचा. उसके चेहरे पर अपने प्रियजन से मिलने की खुशी भी थी और उनकी रिहाई की उम्मीद भी.
विधायक कंचन तनवे ने भी बांधी राखी
रक्षाबंधन के अवसर पर खंडवा विधायक कंचन तनवे भी जिला जेल पहुंचीं. उन्होंने जेल में बंद कैदियों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें भाईचारे, प्रेम और सकारात्मक सोच का संदेश दिया. विधायक ने कहा कि जीवन में गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने बंदियों से अच्छे रास्ते पर चलने का संकल्प लेने की अपील भी की.

बंदियों के लिए बने विशेष इंतजाम
रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए जिला जेल में विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं. शासन के निर्देशों के तहत बहनों को अपने भाइयों से मिलने और उन्हें राखी बांधने की सुविधा उपलब्ध कराई गई. बड़ी संख्या में महिलाएं जेल पहुंचीं और अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सलामती और अच्छे भविष्य की कामना की.
जेल प्रशासन ने दी जानकारी
जिला जेल अधीक्षक देवेंद्र कुमार सारस ने बताया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार जेल में रक्षाबंधन पर्व मनाया गया. बंदियों और उनके परिजनों के बीच मुलाकात की व्यवस्था की गई, ताकि वे इस विशेष अवसर पर अपने रिश्तों की गर्माहट महसूस कर सकें. उन्होंने कहा कि त्योहारों के ऐसे आयोजन बंदियों को भावनात्मक संबल देने के साथ-साथ उन्हें समाज से जुड़े रहने का अवसर भी प्रदान करते हैं.