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This Article is From Jan 22, 2026

NGT Order:भोपाल में 50 अवैध प्लास्टिक यूनिट्स होंगी बंद, बायोडिग्रेडेबल पैकेट में मिलेंगे चिप्स-नमकीन

Multi Layer Plastic Ban MP: एनजीटी ने भोपाल में 50 अवैध प्लास्टिक यूनिट्स को बंद करने और चिप्स के पैकेट जैसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) की जगह बायोडिग्रेडेबल विकल्प इस्तेमाल करने का सख्त आदेश दिया है. जानिए कैसे यह फैसला आपकी सेहत और पर्यावरण को माइक्रोप्लास्टिक के खतरे से बचाएगा.

NGT Order:भोपाल में 50 अवैध प्लास्टिक यूनिट्स होंगी बंद, बायोडिग्रेडेबल पैकेट में मिलेंगे चिप्स-नमकीन

NGT Bhopal Order: भोपाल में चल रही 50 से ज्यादा अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट्स आज करीब 2 लाख लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने इस मामले पर खुद संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार और नगर निगमों को कड़ी चेतावनी दी है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्लास्टिक प्रदूषण और शरीर में घुलने वाले 'माइक्रोप्लास्टिक' के खतरे को रोकने के लिए सरकार तुरंत सख्त कदम उठाए.कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि हवा, पानी और मिट्टी में मिल चुका प्लास्टिक अब इंसानों के लिए बड़ा जोखिम बन गया है. एनजीटी ने सुझाव दिया है कि मल्टी-लेयर प्लास्टिक (जैसे चिप्स के पैकेट आदि) की जगह अब बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए.

रिहायशी इलाकों से हटेंगी अवैध फैक्ट्रियां

एनजीटी ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि आबादी के बीच चल रही अवैध प्लास्टिक फैक्ट्रियां पर्यावरण के नियमों को तोड़ रही हैं. कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है कि इन फैक्ट्रियों को तत्काल बंद किया जाए या फिर इन्हें शहर से दूर इंडस्ट्रियल एरिया में शिफ्ट किया जाए. इसके साथ ही, चिप्स के पैकेट जैसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक को बंद कर उसकी जगह ऐसे विकल्प लाने को कहा गया है जो मिट्टी में आसानी से गल सकें.

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रोजमर्रा के सामान पर लगेगा बैन

कोर्ट की चिंता उन बारीक प्लास्टिक कणों (माइक्रोप्लास्टिक) को लेकर भी है जो दिखाई नहीं देते. एनजीटी ने निर्देश दिया है कि फेस वॉश और कॉस्मेटिक जैसे पर्सनल केयर उत्पादों में माइक्रोप्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए. यही नहीं, अब ऐसी वॉशिंग मशीनों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है जिनमें फिल्टर लगे हों, ताकि कपड़ों से निकलने वाला प्लास्टिक कचरा नालियों के जरिए हमारी नदियों और तालाबों को जहरीला न बनाए.

हवा और पानी की होगी कड़ी जांच

प्रदूषण कितना गहरा है, इसे मापने के लिए अब साल में दो बार नगर निगमों को पानी की सप्लाई और तालाबों की जांच करनी होगी. यह देखा जाएगा कि कहीं हमारे पीने के पानी में प्लास्टिक के कण तो नहीं मिल रहे. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को ऐसी नई मशीनें और तकनीक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जो हवा, पानी और मिट्टी से माइक्रोप्लास्टिक को छानकर बाहर निकाल सकें. जजों का मानना है कि यह प्लास्टिक लंबे समय में शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.

सरकार को 4 हफ्ते की डेडलाइन

एनजीटी ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत प्रदेश के बड़े शहरों के नगर निगमों को इस अभियान में शामिल किया है. पर्यावरण सचिव को आदेश दिया गया है कि वे जिला समितियों के साथ मिलकर अब तक की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट अगले 4 हफ्तों के अंदर कोर्ट में जमा करें. एनजीटी ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. केस की अगली सुनवाई 27 मार्च 2026 को होगी.भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए एनजीटी ने सुझाव दिया है कि मल्टी-लेयर प्लास्टिक (जैसे चिप्स के पैकेट आदि) की जगह अब बायोडिग्रेडेबल विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए. टायर, डिटर्जेंट और सड़क बनाने के सामान में भी ऐसे बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे प्रदूषण कम हो. पर्यावरण सचिव को इन सभी निर्देशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अगले चार हफ्तों के भीतर जमा करनी होगी. इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 मार्च 2026 को होगी.
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