सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में होगी बैठक.
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मध्य प्रदेश की कैबिनेट बैठक आज भोपाल के समीप स्थित ऐतिहासिक जगदीशपुर में आयोजित होने जा रही है, जहां कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को सदन में पेश करने की मंजूरी दी जाएगी. इसके अलावा 8 और विधेयकों को मंजूरी मिलेगी. फिर इन बिलों को 20 जुलाई से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाएंगे.
कैबिनेट में इन विधेयकों (बिल) को मिलेगी मंजूरी
- मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026
- मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक 2026
- फायर एक्ट 2026
- निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026
- मध्य प्रदेश धनवंतरी स्वास्थ्य विवि विधेयक
- मप्र निजी कोचिंग संस्थान (रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन) विधेयक, 2026
- ईज आफ डूइंग बिजनेस
- मध्य प्रदेश श्रम संहिता 2026
- मप्र निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक: सबसे अहम विधयेक निजी विवि खोलने की शर्तों के सरलीकरण से जुड़ा है. इसके तहत अब मल्टीस्टोरी प्राइवेट यूनिवसिर्टी भी खुल सकेंगी. इसके लिए अबतक निजी विवि खोलने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन की पाबंदी को खत्म किया जा रहा है. इसकी जगह ‘पर्याप्त जमीन होना' शब्द जोड़ा जा रहा है. इसके बाद कोई भी विवि शहर के भीतर या सीमा के पास भी विवि खोल सकेगा. देश के बड़े शहरों में दो से पांच एकड़ जमीन होने पर भी विवि खोले गए हैं. इसी अवधारणा को मप्र में लागू किया जा रहा है. नई शिक्षा नीति के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों को लागू करने के लिए निजी यूनिवर्सिटी खोलने के सख्त नियम सरल हो रहे हैं.
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: एमपी ईज ऑफ डूइंग एक्ट 2026 में एक बड़ा प्रावधान किया जा रहा है. मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में एक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) सचिवालय खुलेगा, जहां नई इंडस्ट्री की सभी मंजूरियां सिंगल विंडो में मिलेंगी. सभी विभाग अपने अधिकारों को ट्रांसफर करेंगे. जो विभाग ऐसा नहीं करेगा, उसके अधिकारी की पदस्थापना ईओडीबी सचिवालय में होगी. निवेशक खुद हलफनामा देंगे कि वे इंडस्ट्री लगाने जा रहे हैं. इसी आधार पर लेटर ऑफ स्टेब्लिशमेंट जारी हो जाएगा. पीसीबी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होगा. इसी में 4-5 माह लगते हैं.
- मप्र निजी कोचिंग संस्थान (रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी मिलने वाली है. इसमें 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर रोक रहेगी. यानी कोचिंग में 11वीं से ही प्रवेश होगा. कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीयन अनिवार्य होगा। वे भ्रामक विज्ञापन भी जारी नहीं कर पाएंगे. कोई करता है तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई एक्ट के तहत होगी. इसके अलावा किसी कोचिंग से छात्र या छात्रा बीच में पढ़ाई छोड़ता है तो 10 दिन में प्रो-राटा-बेसिस (यथानुपात आधार) पर फीस रिफंड की व्यवस्था होगी.
- मप्र समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026: मुख्य प्रावधानों में विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार के लिए सभी धर्मों के लिए एक समान कानून. लिव-इन का अनिवार्य पंजीकरण, पैतृक संपत्ति में महिला और पुरुष को समान अधिकार. इस विधेयक से जनजातियों को दूर रखा गया है.
- मप्र श्रम संहिता, 2026: 6 पुराने श्रम कानून समाप्त कर केंद्रीय श्रम कोड के अनुकूल एकीकृत कानून लागू करना. थिएटर-रेस्तरां के 24/7 संचालन के लिए तीन शिफ्टों में काम. नए प्रतिष्ठान की स्थापना आवेदन पर इंस्पेक्टर वेरिफिकेशन खत्म.
- मप्र नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026: बीएनएसएस के अनुरूप न्यायिक और पुलिस जांच प्रक्रिया को डिजिटल बनाना.
मानसून सत्र में ये बिल भी होंगे अहम
- मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026: 2 जून को कैबिनेट से मंजूर अध्यादेश के स्थान पर बिल आ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति की खरीद-बिक्री की रजिस्ट्री पर अभी 1 प्रतिशत जनपद उपकर लगता है. अब सरकार ने स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री निशुल्क कराने का निर्णय लिया है, इसलिए कानून में संशोधन कर सिर्फ इस योजना से जुड़ी रजिस्ट्री में छूट का प्रावधान जोड़ा जाएगा.
- मप्र उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026: 2 जून को लागू अध्यादेश के स्थान पर लाया जा रहा है. इस कानून के तहत राज्य सरकार विभिन्न विकास परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए उपकर के रूप में फंड जमा करती है. लेकिन स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के अधिकार पत्रों की रजिस्ट्री में इस कर (संपत्ति के मूल्य का 0.5%) से छूट का प्रावधान जोड़ा जाएगा.
- मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 को पीडब्ल्यूडी ला रहा है. इसके बाद प्रदेशभर में स्टेट हाईवे पर अवैध कट और अतिक्रमण रोकने के लिए कड़े प्रावधान जोड़े जाएंगे.
- मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026: इसमें 15 मीटर से ऊंची बहुमंजिला इमारतों, स्कूल (500 से ज्यादा विद्यार्थी), होटल (15 से ज्यादा रूम), मॉल, अस्पताल (50 से अधिक बिस्तर) और व्यावसायिक परिसरों में फायर एनओसी अनिवार्य होगी. ऐसा नहीं करने पर बड़ा जुर्माना होगा. नगरीय निकायों में प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ‘फायर सेफ्टी टैक्स' लगाने का भी प्रस्ताव है. इससे संसाधन जुटाए जाएंगे.
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