मध्य प्रदेश के कटनी जिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा- 'हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए? सबके लिए एक ही कानून होना चाहिए. अगर राम एक ही शादी करेंगे, तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं.
#WATCH | Katni: Madhya Pradesh CM Mohan Yadav says, "...Why should there be separate laws for Hindus and Muslims? There should be one law for everyone. If Ram will marry once, why should Rahim marry twice or four times? Muslim sisters are also our sisters. Under the proposed… pic.twitter.com/rz8nwRNCsQ
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) July 17, 2026
कोई तीन तलाक देगा तो जेल जाएगा
सीएम यादव ने कहा- 'यूसीसी के तहत मध्य प्रदेश में कानूनी रूप से रहने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को होगा जो एक शादी करेगा, सबके लिए एक ही व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने कहा- अगर कोई अब तलाक, तलाक, तलाक कहेगा, तो उसे जेल भेज दिया जाएगा. तीन तलाक का दौर अब खत्म हो चुका है. केवल एक ही शादी को कानूनी मान्यता दी जाएगी.
मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक
सीएम यादव ने कहा- 'मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी कानून लेकर आ रही है, क्योंकि नागरिकों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. इस देश में हम सब भारत माता की संतान हैं. हम आगामी मानसून सत्र में यह विधेयक पेश करने जा रहे हैं. विधानसभा में विधेयक ले जाने से पहले, हम इसे भोपाल के जगदीशपुर में होने वाली अगली कैबिनेट बैठक में मंजूरी देंगे."
तीन अलग-अलग खंडों में तैयार की रिपोर्ट
बता दें कि 13 जुलाई सोमवार को समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी. इसे तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया है. पहले खंड में समिति की अनुशंसाएं और विभिन्न कानूनों, परंपराओं तथा व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन शामिल किया गया है. इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू व्यवस्थाओं का विश्लेषण करते हुए सुझाव दिए गए हैं. इस खंड में कुल 10 अध्याय शामिल हैं.
404 धाराओं वाला विधेयक का मसौदा तैयार
रिपोर्ट का दूसरा खंड सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसमें UCC विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है. समिति ने मध्य प्रदेश की वर्तमान व्यवस्थाओं और नियमों को ध्यान में रखते हुए यह ड्राफ्ट बनाया है. प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं. यही मसौदा आगे चलकर कानून का आधार बन सकता है.