Madhya Pradesh Budget 2026: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश सरकार का बजट करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान है. यह बजट पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक बताया जा रहा है. राज्य का यह अहम बजट 18 फरवरी को विधानसभा में जगदीश देवड़ा पेश करेंगे. ऐसे में बजट को लेकर प्रदेश भर में उत्सुकता बनी हुई है.
सागर को विकास की आस
सागर जिले के नागरिकों को इस बार के बजट से विशेष उम्मीदें हैं. लोगों का कहना है कि शहर में अधूरे विकास कार्यों को गति मिले, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई योजनाओं की घोषणा हो. व्यापारी वर्ग को उम्मीद है कि व्यापार और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राहतकारी प्रावधान किए जाएंगे, जबकि युवाओं को रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं की आस है.
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि सागर के लिए विशेष पैकेज या बड़ी परियोजनाओं की घोषणा होती है तो जिले के विकास को नई दिशा मिल सकती है. अब सभी की निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं, जब विधानसभा में बजट पेश होगा और यह साफ हो जाएगा कि सरकार ने प्रदेश के साथ-साथ सागर के लिए क्या सौगात तैयार की है.
मध्य प्रदेश बजट से सतना की जनता को बड़ी उम्मीदें
इधर, बजट से पहले NDTV ने सतना में आम जनता और व्यापारियों से बातचीत की, जहां लोगों ने सरकार से कई अहम अपेक्षाएं सामने रखीं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश की तुलना में काफी अधिक हैं. ऐसे में बजट में ईंधन की कीमतों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है, ताकि आम आदमी और व्यापारियों को राहत मिल सके.
इसके साथ ही लोगों ने स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया. उनका कहना है कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नए-नए स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाने चाहिए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें. बिजली दरों को लेकर भी जनता ने अपनी बात रखी.
लोगों का कहना है कि बिजली महंगी होने से घरेलू बजट और छोटे उद्योग दोनों प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए सरकार को बिजली को सस्ता करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए. वहीं महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई. लोगों ने कहा कि लाडली बहना जैसी योजनाएं सराहनीय हैं, लेकिन केवल योजनाओं पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय मध्य प्रदेश में रोजगार और उत्पादन के अवसर बढ़ाने की जरूरत है, ताकि आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले.
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