DMF Fund Controversy: मैहर जिले में जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) की वर्ष 2026 की राशि वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सूची में कथित पक्षपात का आरोप लगाते हुए इस पर खुला विरोध दर्ज कराया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला अध्यक्ष कमलेश सुहाने को पत्र लिखकर प्रभारी मंत्री द्वारा स्वीकृत सूची पर आपत्ति जताई है. कार्यकर्ताओं का कहना है कि डीएमएफ राशि के वितरण में कांग्रेस समर्थित पंचायतों को प्राथमिकता दी गई, जबकि भाजपा समर्थित पंचायतों को विकास कार्यों से वंचित कर दिया गया, जिससे संगठन में असंतोष और नाराजगी बढ़ती जा रही है.
डीएमएफ राशि वितरण पर उठे सवाल
भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जिला अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि खनिज मद से प्राप्त डीएमएफ राशि के वितरण में निष्पक्षता नहीं बरती गई. कार्यकर्ताओं का कहना है कि कांग्रेस समर्थित सरपंचों की पंचायतों को बड़ी राशि स्वीकृत की गई, जबकि भाजपा समर्थित पंचायतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. उनका दावा है कि यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर असंतुलन की स्थिति बन रही है.
17 जनवरी 2026 को हुई थी न्यास मंडल की बैठक
जानकारी के अनुसार, जिला खनिज प्रतिष्ठान मैहर के न्यास मंडल की बैठक 17 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी. बैठक के बाद मैहर, अमरपाटन और रामनगर ब्लॉक की कुल 116 पंचायतों के लिए 1212 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी. इसके अलावा नगर परिषद क्षेत्रों में 33 विकास कार्यों के लिए 306 लाख रुपये मंजूर किए गए थे. यह निर्णय प्रभारी मंत्री राधा सिंह के अनुमोदन के बाद कलेक्टर एवं जिला खनिज अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया था.

DMF Fund Controversy: मैहर डीएमएफ विवाद
सूची सामने आते ही शुरू हुआ विरोध
डीएमएफ की सूची सार्वजनिक होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष उभरकर सामने आ गया. आरोप लगाया गया कि सूची में राजनीतिक आधार पर पंचायतों का चयन किया गया है. विरोध तेज होते ही यह मामला जिला स्तर से आगे बढ़कर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया. कार्यकर्ताओं ने संगठन के भीतर भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है.
विवाद के बाद बदली सूची, रामनगर ब्लॉक बाहर
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन को संशोधित सूची जारी करनी पड़ी. नई सूची में जहां अमरपाटन और मैहर की पंचायतों के लिए 620 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई, वहीं रामनगर ब्लॉक को पूरी तरह से सूची से बाहर कर दिया गया. इस फैसले से रामनगर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई है.
राजनीतिक तूल पकड़ने की आशंका
रामनगर ब्लॉक को बाहर किए जाने के बाद यह विवाद और गहराने की आशंका जताई जा रही है. स्थानीय नेताओं का कहना है कि डीएमएफ जैसी महत्वपूर्ण राशि के वितरण में पारदर्शिता जरूरी है. अब यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है, क्योंकि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है.
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