Maihar Corruption Case: मैहर जिले (Maihar News) के संकुल केंद्र बड़ा इटमा के शासकीय हाई स्कूल सुलखमा में बड़ा फर्जीवाड़ा (Corruption Case) सामने आने के बाद प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है. प्राचार्य के खिलाफ घटिया निर्माण की जांच करने पहुंची जांच टीम ने चौकाने वाला प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसके बाद सहायक शिक्षक एवं उच्च पद प्रभार प्रभारी प्राचार्य रामलाल साकेत को निलंबित कर दिया गया. शासकीय हाईस्कूल सुलखमा में लघु निर्माण कार्य के लिए लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के आदेश क्रमांक लोशिस/भवन/सी/2025/601 दिनांक 01 सितंबर 2025 के तहत विद्यालय में पार्किंग शेड एवं साइकिल स्टैंड निर्माण के लिए 24 लाख 65 हजार रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी. यह राशि शासकीय नियमों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए 30 सितंबर 2025 के पूर्व विद्यालय की एसएमडीसी समिति को व्यय हेतु उपलब्ध कराई गई थी.
Maihar Corruption Case: आदेश की कॉपी
सीएम हेल्पलाइन में हुई थी घटिया निर्माण की शिकायत
निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप न होने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 35349465 के माध्यम से 14 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई थी. शिकायत की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच दल गठित की गई. जिसमें प्राचार्य सांदीपनी शासकीय उमावि मैहर तथा कनिष्ठ लेखा परीक्षक, कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी मैहर को शामिल किया गया. जांच दल द्वारा विस्तृत जांच के उपरांत प्रतिवेदन क्रमांक/सतर्कता/जांच/561 दिनांक 08 जनवरी 2026 को प्रस्तुत किया गया.
जांच प्रतिवेदन में यह गंभीर तथ्य उजागर हुआ कि शासकीय हाईस्कूल सुलखमा के प्राचार्य द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना वाणी इन्फ्रास्ट्रक्चर विदिशा रोड भोपाल को 23 लाख 81 हजार 222 रुपये के भुगतान की स्वीकृति सितंबर 2025 में जारी कर दी गई. इसके आधार पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामनगर के आदेश क्रमांक/लोशिसं/बजट/लघु निर्माण कार्य/2025-26/27/1488 दिनांक 29 सितंबर 2025 द्वारा कोषालय से देयक का भुगतान कर दिया गया.
भुगतान के एक माह बाद दिए कार्य के आदेश
संबंधित निर्माण कार्य का वर्क ऑर्डर 25 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया. अर्थात भुगतान पहले कर दिया गया और कार्य आदेश बाद में जारी हुआ. जांच में संपूर्ण प्रक्रिया में ऐसी कई अन्य विसंगतियां भी पाई गईं. जांच प्रतिवेदन एवं संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन के बाद शासकीय राशि के नियम विरुद्ध व्यय एवं खुर्द-बुर्द किए जाने का मामला प्रमाणित पाया गया. उक्त अवधि में संस्था में प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदस्थ रामलाल साकेत, मूलपद सहायक शिक्षक, द्वारा यह कृत्य किया गया.
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