MP High Court: 92 हजार कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर्स की नौकरी पर मंडराता खतरा टला, आउटसोर्सिंग आदेश पर हाईकोर्ट सख्त

Madhya Pradewsh High court: राज्य सरकार ने 2025–26 सत्र के बीच अचानक इन पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने का आदेश जारी कर दिया था. इससे पहले से कार्यरत हजारों इंस्ट्रक्टर्स की नौकरी पर असमंजस की स्थिति बन गई थी. याचिका में कहा गया कि यह निर्णय उनके भविष्य और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

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Computer Operator: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे लगभग 92 हजार कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर्स को बड़ी राहत मिली है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत इन पदों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था के जरिए भरने की प्रक्रिया शुरू की गई थी. यह आदेश न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने पारित किया.

यह मामला मंडला निवासी अर्जित नामदेव की ओर से दायर याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष आया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखते हुए बताया कि कम्प्यूटर इंस्ट्रक्टर्स की नियुक्ति राज्य शासन की अतिथि शिक्षक व्यवस्था के तहत मेरिट के आधार पर की गई थी.

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का हवाला

अदालत को बताया गया कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया GFMS पोर्टल के माध्यम से की गई थी. इसमें ऑनलाइन आवेदन, मेरिट सूची जारी करना, विकल्प चयन, दस्तावेज सत्यापन और कार्यभार ग्रहण जैसी सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत पूरी की गईं. इंस्ट्रक्टर्स कई शैक्षणिक सत्रों से नियमित सेवाएं दे रहे हैं और विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं.

उटसोर्सिंग आदेश से क्यों बढ़ी चिंता

दरअसल, राज्य सरकार ने 2025–26 सत्र के बीच अचानक इन पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने का आदेश जारी कर दिया था. इससे पहले से कार्यरत हजारों इंस्ट्रक्टर्स की नौकरी पर असमंजस की स्थिति बन गई थी. याचिका में कहा गया कि यह निर्णय उनके भविष्य और आजीविका के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.

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आरक्षण लाभ पर भी पड़ सकता था असर

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि अधिकांश इंस्ट्रक्टर्स लगभग ढाई शैक्षणिक सत्र पूरे कर चुके हैं और भर्ती नियमों के तहत निर्धारित 200 कार्यदिवस व 3 शैक्षणिक सत्र पूर्ण करने के करीब हैं. इन शर्तों की पूर्ति के बाद उन्हें भविष्य की प्रत्यक्ष भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सकता था. आउटसोर्सिंग लागू होने से यह वैधानिक अवसर समाप्त हो सकता था.

कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिंग आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य शासन को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. इसका मतलब है कि फिलहाल वर्तमान व्यवस्था जारी रहेगी और इंस्ट्रक्टर्स की सेवाओं पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा.

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अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 फरवरी तय की है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में कोर्ट क्या अंतिम रुख अपनाता है.

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