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मप्र सरकार ने हाईकोर्ट में कबूला, ‘इंदौर में 16 लोगों की मौत का दूषित पेयजल से हो सकते हैं संबंध’

Indore Water Contamination Case: हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि भागीरथपुरा के कुल 23 मृतकों के ‘डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें संभावना जताई गई कि इनमें से 16 लोगों की मौत का संबंध दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है.

मप्र सरकार ने हाईकोर्ट में कबूला, ‘इंदौर में 16 लोगों की मौत का दूषित पेयजल से हो सकते हैं संबंध’

Indore water contamination news: मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Government) ने मंगलवार को उच्च न्यायालय को बताया कि इंदौर के भागीरथपुरा में 16 लोगों की मौत का संबंध इस इलाके में दूषित पेयजल के कारण महीना भर पहले फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है. आपको बता दें कि भागीरथपुरा में यह प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत की खबरें आई थी. स्थानीय नागरिकों का दावा है कि इस मामले में अब तक कम से कम 28 लोगों की मौत हो चुकी है.

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई कर रही है. इस दौरान, राज्य सरकार की ओर से भागीरथपुरा के कुल 23 मृतकों के ‘डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें संभावना जताई गई कि इनमें से 16 लोगों की मौत का संबंध दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से हो सकता है.

जांच टीम की रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा

शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के पांच विशेषज्ञों की समिति की तैयार रिपोर्ट में कहा गया कि भागीरथपुरा के चार लोगों की मौत का इस प्रकोप से कोई संबंध नहीं है, जबकि इस इलाके के तीन अन्य व्यक्तियों की मृत्यु के कारण को लेकर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है. सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि उसकी इस रिपोर्ट के पीछे आखिर कौन-सा वैज्ञानिक आधार है?

पीड़ित के वकील ने जांच पर उठाए सावल

युगल पीठ ने रिपोर्ट के संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से इस्तेमाल ‘वर्बल ऑटोप्सी' (मौखिक शव परीक्षण) शब्द पर अचरज भी जताया और कटाक्षपूर्ण लहजे में कहा कि उसने यह शब्द पहली बार सुना है. उच्च न्यायालय में बहस के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील अजय बागड़िया ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि प्रदेश सरकार ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान लोगों की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं की है. बागड़िया ने रिपोर्ट को अस्पष्ट करार देते हुए कहा कि यह दस्तावेज ‘‘अनिश्चितताओं और रहस्यों'' से भरा है और प्रदेश सरकार भागीरथपुरा की पेयजल त्रासदी की हकीकत पर पर्दा डालने के लिए अदालत से जानबूझकर तथ्य छिपा रही है.

कोर्ट में पेश की जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

जनहित याचिकाओं पर बहस के दौरान प्रदेश सरकार के एक वकील ने कहा कि भागीरथपुरा में लोगों की मौत के कारण को लेकर अदालत के सामने विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी और याचिकाकर्ताओं के वकील इस पर अपना जवाब पेश कर सकते हैं. प्रदेश सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वह भागीरथपुरा मामले में उच्च न्यायालय के तमाम निर्देशों का पालन कर रही है. प्रदेश सरकार ने इस मामले में अदालत के सामने स्थिति रिपोर्ट भी पेश की. रिपोर्ट के मुताबिक, भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान स्थानीय अस्पतालों में कुल 454 मरीजों को भर्ती किया गया जिनमें से 441 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है और फिलहाल 11 रोगी अस्पतालों में भर्ती हैं.

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अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद इस इलाके के 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई' बैक्टीरिया की मौजूदगी के बारे में पता चला. अधिकारियों ने कहा कि इस बैक्टीरिया के कारण भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए. उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण इसमें एक शौचालय के सीवर का पानी भी मिला था.

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