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MP Election Result: खूब चला कैलाश और सिंधिया का जादू, दोनों के गढ़ में बंपर जीत से भाजपा ने बनाई बड़ी बढ़त

Madhya Pradesh Election Results Update: भाजपा ने रविवार को हुई मतगणना में मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 में से 163 सीट जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर ली है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 66 सीट पर सिमट गई है.

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MP Election Result: खूब चला कैलाश और सिंधिया का जादू, दोनों के गढ़ में बंपर जीत से भाजपा ने बनाई बड़ी बढ़त

Madhya Pradesh Election Results 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की शानदार जीत के पीछे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मालवा-निमाड़ यानी भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के गढ़ और ग्वालियर-चंबल यानी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में प्रभावशाली प्रदर्शन पार्टी की जीत के प्रमुख वजहों में से एक है.  

भाजपा ने रविवार को हुई मतगणना में मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 में से 163 सीट जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल कर ली है, जबकि कांग्रेस सिर्फ 66 सीट पर सिमट गई है.

मालवा-निमाड़ में 66 में 48 सीटें जीती भाजपा

15 जिलों में फैले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कुल 66 विधानसभा क्षेत्रों में से 48 में जीत हासिल की.  2018 की तुलना में उसे 20 सीट का फायदा हुआ, जबकि कांग्रेस की संख्या 17 रह गई है.

रतलाम जिले की सैलाना सीट भारत आदिवासी पार्टी ने जीती है. यह आदिवासी पार्टी राज्य की राजनीति में एक नई पार्टी है. इंदौर-1 सीट से जीतने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मालवा निमाड़ से एक प्रमुख चेहरा रहे हैं.

यहां 2018 में था कांग्रेस का जलता

इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनाव में, मालवा-निमाड़ और ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कांग्रेस को भारी समर्थन मिला था, जिसकी वजह से कांग्रेस 114 सीटें जीत कर सत्ता हासिल करने में सफल हो गई थी. पिछले चुनाव में, कांग्रेस ने मालवा निमाड़ इलाके के 35 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा की संख्या 2013 में जीती गई 57 सीट से घटकर 28 रह गई थी.

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की 34 सीट में से आधी से अधिक सीटें जीत ली है. इस पूर्व कांग्रेस राजनेता और वर्तमान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है. हालांकि, जो लोग 2020 में कांग्रेस से बगावत करके पार्टी में शामिल हुए थे, उनमें से कई को इस चुनाव में धूल चाटनी पड़ी.

2018 में ग्वालियर-चंबल में खूब चली थी कांग्रेस की हवा

2018 के चुनाव में जब सिंधिया कांग्रेस में थे तो कांग्रेस ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की 34 में से 26 सीट जीती थीं. वहीं, 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने सिंधिया की गैरमौजूदगी में 10 सीट भाजपा के हाथों गंवा दीं है. भाजपा के पास अब ग्वालियर चंबल से 18 विधायक हैं. उसे बसपा की एक सीट का भी फायदा हुआ है. इस क्षेत्र के प्रमुख चेहरों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मुरैना जिले की दिमनी सीट जीत ली, लेकिन वरिष्ठ भाजपा नेता और राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने गृह क्षेत्र दतिया में हार गए हैं.

सभी संभागों में भाजपा को हुआ है फायदा

भाजपा ने 26 सीट वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में कांग्रेस से चार सीटें छीन ली है. अब उसकी सीट बढ़कर 21 हो गई हैं.

इस बार, भाजपा ने मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख क्षेत्रों- बुंदेलखंड, विंध्य, महाकौशल और मध्य क्षेत्र (भोपाल और नर्मदापुरम संभाग) शामिल हैं, में अलग-अलग संख्या में सीट जोड़ीं. भाजपा ने 26 सीट वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में कांग्रेस से चार सीटें छीन ली है. अब उसकी सीट बढ़कर 21 हो गई हैं. कुल मिलाकर 38 खंडों वाले महाकोशल क्षेत्र में, भाजपा ने अपनी पिछली सीट में आठ सीट जोड़ ली है. जिससे वर्तमान में यहां भाजपा की सीटों की संख्या 21 हो गई है, जबकि कांग्रेस की संख्या पिछली बार के 24 से घटकर 17 रह गई है. कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ का निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा इसी क्षेत्र में आता है, जहां से वे खुद जीत गए हैं. केंद्रीय मंत्री और भाजपा के आदिवासी चेहरे फग्गन सिंह कुलस्ते मंडला जिले की निवास सीट हार गए, जबकि उनके कैबिनेट सहयोगी प्रहलाद सिंह पटेल महाकौशल के नरसिंहपुर निर्वाचन क्षेत्र से जीतने में कामयाब रहे.

शिवराज के गढ़ में भी भाजपा की बल्ले-बल्ले

30 विधानसभा वाले विंध्य क्षेत्र में भाजपा ने 25 सीट पर जीत हासिल की है

, जबकि एक कांग्रेस से छीन ली है. कांग्रेस की कुल सीट अब पांच हो गई है. भाजपा नेता और लोकसभा सदस्य गणेश सिंह विंध्य के सतना विधानसभा क्षेत्र से हार गए हैं. मध्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  की हाई-प्रोफाइल बुधनी सीट सहित 36 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. यहां भी भाजपा ने कांग्रेस से सात सीटें छीन ली है. इसके साथ ही यहां भाजपा के विजयी उम्मीदवारों की संख्या 31 हो गई है. मध्य क्षेत्र में कांग्रेस की जीत का आंकड़ा 12 से घटकर 5 रह गई है. इस क्षेत्र में भोपाल और नर्मदापुरम राजस्व मंडल शामिल हैं.  2018 के 12 की तुलना में कांग्रेस इस बार मात्र पांच सीटें ही जीत पाई है.

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भाजपा को इस बार 48.55 फीसदी वोट मिले हैं, जो 2018 की तुलना में सात फीसदी से ज्यादा है। 2018 के चुनाव में पार्टी को 41.02 फीसदी वोट मिले थे. दूसरी ओर, कांग्रेस का वोट शेयर 40.89 प्रतिशत (2018) के मुकाबले लगभग 40.40 प्रतिशत पर ही रहा, जबकि उसकी सीट 114 से गिरकर 66 सीट पर आ गईं. 

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