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Indore-2 Assembly Seat: इंदौर-2 सीट पर अजेय BJP! इस बार भी मिली सबसे बड़ी जीत, आखिर कैसे?

अगर बात करें रमेश मेंदोला की जीत के मुख्य कारण की तो वह उनके यहां रोजाना लगने वाले जनता दरबार को माना जा सकता है. उनके निवास पर बने एक बड़े कार्यालय पर क्षेत्र की जनता उन तक पहुंचती है और वह सबसे मिलते हैं. वह सभी की समस्याएं सुनते हैं और उसी समय उन समस्याओं का समाधान कर देते हैं.

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Indore-2 Assembly Seat: इंदौर-2 सीट पर अजेय BJP! इस बार भी मिली सबसे बड़ी जीत, आखिर कैसे?
बीजेपी को इंदौर-2 पर कैसे मिली सबसे बड़ी जीत?

Indore-2 Assembly Seat: भाजपा का गढ़ बन चुके इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 से 'रॉबिन हुड' की छवि रखने वाले रमेश मेंदोला ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जीत हासिल की है. वह 1 लाख 7047 वोटों से चुनाव जीते हैं. भाजपा के विधायक रमेश मेंदोला को क्षेत्र में 'दादा दयालु' के नाम से भी जाना जाता है. उनकी जीत की मुख्य वजह रोजाना सुबह उनके निवास पर लगने वाला 'जनता दरबार' है जहां वह अपनी विधानसभा के लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्या का समाधान कर देते हैं. 

इंदौर का विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-2 मध्य प्रदेश में बीजेपी का गढ़ कहा जाता है, जहां 30 साल से भाजपा का ही विधायक चुनाव जीतते आ रहा है. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से विधायक पद पर जीत दर्ज करने वाले रमेश मेंदोला को भाजपा ने साल 2023 में भी अपना उम्मीदवार बनाया. कांग्रेस ने भी इस बार नगर निगम में विपक्ष के नेता चिंटू चौक को यहां से उम्मीदवार बनाया जो विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 से ही कांग्रेस के पार्षद हैं. लेकिन वह भी रमेश मेंदोला की जीत के रथ को नहीं रोक पाए.

चौथी बार जीता चुनाव

इस बार भी रमेश मेंदोला ने मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों, 107047, से सबसे बड़ी जीत हासिल की है. साल 2008 से अब तक इस विधानसभा से रमेश मेंदोला तीन बार विधायक रहे हैं. यह उनका चौथा चुनाव है जो उन्होंने इस विधानसभा से जीता है. इंदौर लोकसभा क्षेत्र की इंदौर-2 विधानसभा सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2018 में कुल 3,35,262 मतदाता थे, जिन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी रमेश मेंदोला को 1,38,794 वोट देकर जिताया था. उधर, कांग्रेस उम्मीदवार एडवोकेट मोहन सिंह सेंगर को 67,783 वोट हासिल हो सके थे. पिछली बार जीत-हार का अंतर 71011 वोटों का था.

जनता दरबार लगाने से हुआ फायदा

अगर बात करें रमेश मेंदोला की जीत के मुख्य कारण की तो वह उनके यहां रोजाना लगने वाले जनता दरबार को माना जा सकता है. उनके निवास पर बने एक बड़े कार्यालय पर क्षेत्र की जनता उन तक पहुंचती है और वह सबसे मिलते हैं. वह सभी की समस्याएं सुनते हैं और उसी समय उन समस्याओं का समाधान कर देते हैं. इसके अलावा पूरे 5 साल वह जनता से कभी दूरी नहीं बनाते. साल में होने वाले गणेश उत्सव, नवरात्र और अन्य त्योहारों पर बड़े-बड़े आयोजन अपने विधानसभा क्षेत्र के हर वार्ड में करवाते हैं. इसके अलावा अलग-अलग धार्मिक कथाएं भी उनकी तय हैं और इन सभी आयोजनों में वह स्वयं शामिल होते हैं और बड़े भंडारे भी कराते हैं.

जीतने के मुख्य कारण क्या हैं?

सरल शब्दों में कहें तो वह जनता को धर्म के सहारे जोड़कर रखते हैं. इसके अलावा क्षेत्र में उन्होंने विकास में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है. अपनी विधानसभा में हर वह काम करने में वह कामयाब रहते हैं जिसकी लोगों को जरूरत है. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के करीबी होने का भी उन्हें फायदा मिलता है. कैलाश विजयवर्गीय भी इस विधानसभा से विधायक रहे हैं और उन्होंने भी इस क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराए हैं. कैलाश विजयवर्गीय के करीबी होने के चलते उनका कोई काम कहीं नहीं रुकता है. एक और बड़ा कारण यह भी है कि वह अपने क्षेत्र के तमाम पार्षदों से सीधा संपर्क रखते हैं. यही वजह है कि मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में उन्हें कामयाबी मिली.

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