
Ujjain Kaal Bhairav Mandir: मध्य प्रदेश शासन का 17 धार्मिक नगरों में शराब बंदी का फैसला मंगलवार से लागू हो जाएगा. इस आदेश के तहत उज्जैन शहर में भी शराब नहीं बिकेगी. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रसिद्ध काल भैरव को मदिरा का भोग लगाने की परंपरा का पालन कैसे होगा. श्रद्धालुओं के मन में उठ रहे इसी सवाल का जवाब एनडीटीवी ने पुजारियों से जाना जो इस प्रकार है.
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के कोतवाल कहे जाने वाले काल भैरव को सदियों से मदिरा का भोग लगाया जाता है. देशभर से आने वाले दर्शनार्थी आसानी से इस मान्यता का निर्वाह कर सकें, इसलिए मदिरा बिक्री के लिए मंदिर के सामने 2 काउंटर खोले गए थे. अब तक श्रद्धालु यहां से शराब खरीदकर भगवान काल भैरव को अर्पित करते थे, लेकिन प्रदेश सरकार के 1 अप्रैल से नगरीय सीमा में शराबबंदी के फैसले के चलते शहर की अन्य दुकानों के साथ सोमवार को इसे भी बंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी.
नतीजतन यहां असमंजस कि स्थिति बनी हुई है. इस संबंध में बाहर से आए श्रद्धालु साथ में शराब लाकर चढ़ाने या फिर अन्य प्रसाद चढ़ाने की बात कर रहे हैं.
अनादि काल से मदिरा पिलाने की परंपरा
मंदिर के पुजारी अभिजीत चतुर्वेदी ने कहा कि काल भैरव को तामसी देव के रूप में पूजने के कारण अनादि काल से मदिरा का भोग लगाया जाता है. श्रद्धालु बाहर से मदिरा लेकर आते हैं. उसमें से बाबा को पिलाकर शेष प्रसाद के रूप में लौटा दी जाती है. शराबबंदी का फैसला स्वागत योग्य है, लेकिन परंपरा अनुसार मदिरा चढ़ाई जाती रहेगी. अन्य पुजारियों ने बताया कि कुंभ 2016 में शराब पर प्रतिबंध होने पर सरकार की तरफ से मदिरा उपलब्ध करवाई थी. मदिरा को नकारात्मक प्रभाव वाली माना जाता है. इसलिए इसे भगवान को अर्पित कर हम उनके सामने दुर्गुणों को छोड़ते हैं.
काल भैरव के लिए शासन को पत्र
मंगलवार से होने वाली शराब बंदी को लेकर सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें उज्जैन सहित 17 शहरों ओर पंचायत क्षेत्रों में शराब दुकानों, बार बंद करने के निर्देश हैं. लेकिन इसमें काल भैरव मंदिर के सामने वाली दुकान का जिक्र नहीं है. इसलिए कलेक्टर नीरज सिंह ने काल भैरव मंदिर के सामने के काउंटर को यथावत रखने के लिए शासन को पत्र लिखा है. वहीं, काल भैरव मंदिर के पास शहरी सीमा से बाहर नजदीकी दुकान को उससे जोड़ने की योजना बनाई जा रही है.
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मंदिर प्रबंधक अनभिज्ञ
खास यह है कि आबकारी विभाग के आदेश पर काल भैरव मंदिर के सामने के शराब के काउंटर हटाए जा रहे हैं, लेकिन आगे की व्यवस्था की जानकारी मंदिर की प्रबंधक सांध्य मार्कण्ड को भी नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रशासन का कोई पत्र नहीं आया, सिर्फ प्रशासक का वॉट्सऐप पर हार फूल की दुकानों पर शराब नहीं बिकने का मैसेज आया है. इधर आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें शासन की ओर से मंदिर को लेकर अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं. इसलिए सभी दुकान बंद करवाई जा रही हैं.
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