Khajuraho Dance Festival 2026: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आयोजित विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव का आगाज भले ही भव्य मंच और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ हुआ, लेकिन पहले ही दिन मंच पर ऐसा दृश्य बन गया जिसने आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए. 20 से 26 फरवरी तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन के उद्घाटन समारोह में दर्शकों का धैर्य तब जवाब दे गया, जब तय समय से करीब दो घंटे की देरी के बाद भी मंच से राजनीतिक भाषणों का सिलसिला जारी रहा.
तय समय से दो घंटे देरी, दर्शक हुए नाराज
कार्यक्रम की शुरुआत शाम 6:30 बजे निर्धारित थी, लेकिन मुख्य अतिथियों और मंत्रियों के विलंब से पहुंचने के कारण समारोह रात लगभग 8:30 बजे शुरू हो पाया. लंबे इंतजार से पहले ही दर्शक असहज हो चुके थे. विदेशी पर्यटकों के सामने ही संस्कृति मंत्री की हूटिंग हुई और ‘गो बैक' के नारे लगाए गए.

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भाषणों ने तोड़ा सब्र
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लगभग 16 मिनट तक संबोधन दिया, वहीं सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने करीब 3 मिनट अपनी बात रखी. लेकिन जैसे ही संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी मंच पर भाषण देने खड़े हुए, दर्शक दीर्घा में बैठे देसी-विदेशी पर्यटकों का गुस्सा फूट पड़ा. कला और नृत्य के लिए पहुंचे दर्शकों ने ‘गो बैक' के नारे लगाने शुरू कर दिए. पूरा पंडाल ‘हो-हो' की आवाज से गूंज उठा. यह हूटिंग विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी में हुई, जिससे आयोजन की छवि पर भी असर पड़ा.
हूटिंग के बीच जारी रहा भाषण
लगातार विरोध के बावजूद मंत्री करीब 6 मिनट तक बोलते रहे. जब शोर बढ़ा, तो उन्होंने चार पंक्तियां सुनाने और जयकारा लगवाने की भी कोशिश की. हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि लोग कार्यक्रम देखने आए हैं, लेकिन कविता सुनाए बिना मंच से नहीं उतरे. इस दौरान दर्शकों की नाराजगी साफ झलक रही थी.

विदेशी सैलानियों ने जताई असहजता
इटली के फ्लोरेंस से आए पर्यटक एलेसांद्रो ने कहा कि वे माहौल को महसूस करने और नृत्य का अनुभव लेने आए थे, न कि लंबे भाषण सुनने के लिए. उनकी साथी जूलिया ने भी आयोजन की सुंदरता की सराहना की, लेकिन भाषणों को अनावश्यक रूप से लंबा बताया. उनका कहना था कि वे केवल नृत्य प्रस्तुति देखना चाहती थीं.
व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर उठे सवाल
खजुराहो जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में पहले ही दिन हुआ यह घटनाक्रम व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े करता है. दूर-दराज से आए पर्यटक घंटों इंतजार करते रहे, जबकि मंच पर सियासी भाषण चलते रहे. आने वाले दिनों में आयोजकों के सामने यह चुनौती होगी कि वे कार्यक्रम को समयबद्ध और सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप संचालित करें, ताकि आयोजन की अंतरराष्ट्रीय साख प्रभावित न हो.