देश आजादी के 75 साल से ज्यादा का सफर तय कर चुका है. सरकारें हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे कर रही हैं. लेकिन मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला के मुंगावली ब्लॉक के टीला गांव का टीला टपरा मोहल्ला इन दावों की हकीकत बयान कर रहा है. यहां ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं.
करीब 100 लोगों की आबादी वाले इस मोहल्ले में एक भी हैंडपंप नहीं है. दो कच्चे कुएं ही अब तक प्यास बुझाते थे, लेकिन गर्मी शुरू होने से पहले ही दोनों सूख चुके हैं. ऐसे में पुरुष और महिलाएं सीढ़ी लगाकर लगभग 20 फीट गहरे कुएं में उतरते हैं, नीचे गड्ढा खोदते हैं और जब उसमें थोड़ा पानी भरता है तो उसी मटमैले पानी को बर्तनों में भरकर बाहर लाते हैं. यही पानी घर के काम में भी इस्तेमाल होता है और मजबूरी में पीना भी पड़ रहा है.

ashoknagar mungaoli tila village water crisis ground report handpump demand
कुंए में उतरकर पानी निकालती चुन्नीबाई
जब NDTV की टीम ग्राउंड रिपोर्ट के लिए गांव पहुंची तो हालात चौंकाने वाले थे. लगभग 20 फीट गहरे कुएं में चुन्नीबाई सीढ़ी के सहारे नीचे उतरकर गड्ढा खोद रही थीं. ऊपर खड़े ग्रामीण बेसब्री से पानी भरने का इंतजार कर रहे थे.
चुन्नीबाई और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पानी की भारी किल्लत है. कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि अगर मोहल्ले में एक हैंडपंप लग जाए तो उन्हें गंदा पानी पीने और जान जोखिम में डालकर कुएं में उतरने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

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बूंद-बूंद पानी को मोहताज
टीला ग्राम पंचायत के टीला टपरा मोहल्ले के ग्रामीण अरविंद जाटव, रामप्रसाद अहिरवार, हरप्रसाद, भरोसा और कैलाश अहिरवार बताते हैं कि मोहल्ले में करीब 10 परिवार और लगभग 100 लोग रहते हैं. सभी की निर्भरता सिर्फ कुएं पर थी.
अब कुआं सूख जाने के बाद लोगों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी पानी की भारी समस्या खड़ी हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि वे एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.
अधिकारियों का दावा बनाम जमीनी हकीकत
ग्रामीणों की परेशानी की जानकारी जब NDTV ने प्रशासन को दी तो सूचना मिलते ही पीएचई विभाग के उपयंत्री रोहित त्यागी गांव पहुंचे. उनका कहना है कि करीब 350 मीटर की दूरी पर एक हैंडपंप लगा हुआ है, जहां से लोग पानी ले सकते हैं.
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आने-जाने में लगभग एक किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है. सिर पर पानी ढोकर लाना महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बेहद मुश्किल है. सवाल यह है कि जब मोहल्ले में करीब 100 लोग रहते हैं तो वहां अलग से हैंडपंप या स्थायी जल व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

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सिस्टम पर सवाल
आजादी, योजनाओं और दावों के बीच टीला टपरा की यह तस्वीर सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े करती है. क्या हर घर नल से जल योजना का लाभ इन ग्रामीणों तक पहुंचेगा? क्या उन्हें साफ पानी नसीब होगा या फिर यूं ही जान जोखिम में डालकर कुएं में उतरना पड़ेगा? अब देखना होगा कि इन तस्वीरों के सामने आने के बाद प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है और इन ग्रामीणों को साफ पानी की स्थायी व्यवस्था कब तक मिल पाती है.
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