
Ashoknagar News in Hindi: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोकनगर (Ashoknagar) जिले में खाद की किल्लत से बचने के लिए किसान बोवनी से ढाई महीने पहले ही खाद के लिए गोदाम के सामने लाइन लगाए नजर आए. बुधवार को जिला मुख्यालय अशोकनगर की डबल लॉक गोदाम पर किसानों की कतारें लगी हुई थीं. यह किसान गोदाम पर डीएपी (DAP Fertilizer) लेने आए थे. किसानों का कहना था कि हर साल बोवनी के समय खाद की किल्लत हो जाती है और परेशान होना पड़ता है. इसलिए वह अभी से खाद खरीदकर रखना चाहते हैं. हालांकि, इनमें से कई किसान ऐसे भी थे, जो सब्जी आदि की खेती करते हैं. इसलिए उन्हें मौजूदा समय में ही खाद की जरूरत थी.
इतने लाख हेक्टेयर में होती है बोवनी
जिले में खरीफ सीजन की फसलों की बोवनी 3.08 लाख हेक्टेयर रकबा में होती है. खरीफ सीजन की बोवनी जिले में जून-जुलाई महीने में की जाती है. क्योंकि यह दौर बारिश का होता है, इसलिए इस सीजन की बोवनी के लिए किसानों के पास समय की कमी होती है. कई बार बारिश लगातार होती है और बोवनी का समय नहीं मिलता. यह भी एक वजह है कि किसान समय से पहले ही खाद की व्यवस्था कर लेना चाहता है.
मक्का का रकबा बढ़ा, तो बढ़ेगी मांग
खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन, उड़द, धान एवं मक्का है. इनमें से खाद की जरूरत प्रत्येक फसल को होती है. किसानों का रुझान डीएपी खाद की तरफ अधिक है, जबकि कृषि विभाग के पास डीएपी के कई विकल्प मौजूद हैं. इनका उपयोग करने की सलाह अकसर विभागीय अधिकारी किसानों को देते हैं. जिले में सोयाबीन और उड़द परंपरागत फसलें हुआ करती थीं. लेकिन, बीते कुछ सालों से धान और मक्का के रकबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. यदि इस बार भी मक्का का रकबा पिछले वर्ष के जैसे बढ़ता है, तो डीएपी की अतिरिक्त व्यवस्था करनी होगी.
ये भी पढ़ें :- माधव नेशनल पार्क को एक और सौगात, पिंजरे से निकलते ही जंगल की तरफ दौड़ पड़ा टाइगर, देखिए Video
उप संचालक ने कही ये बात
कृषि गोदाम के उप संचालक केएन कैन ने कहा कि आज जो किसान आए थे, उन्हें करीब एक सप्ताह से मार्च क्लोजिंग के कारण खाद नहीं दी जा सकी थी. इसलिए उन्हें बुलाया गया था. खाद के लिए कोई किल्लत नहीं है.
ये भी पढ़ें :- देश में GST Revenue वृद्धि दर में अग्रणी राज्य बना छत्तीसगढ़, मार्च में पहली बार 2000 करोड़ से अधिक हुआ मासिक संग्रह