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सिंधिया को फिर आई कमलनाथ के तख्तापलट की याद, बताया किस-किस ने दिया स‍ियासी बलिदान?

jyotiraditya scandia on Kamal Nath Government: शिवपुरी के पिछोर में जाटव समाज के सम्मेलन में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमलनाथ सरकार गिरने की घटना को याद करते हुए उन नेताओं के नाम गिनाए, जिन्होंने इस्तीफा देकर उनका साथ दिया था. सिंधिया ने जाटव समाज के राजनीतिक बलिदान की खुले मंच से सराहना की. 

सिंधिया को फिर आई कमलनाथ के तख्तापलट की याद, बताया किस-किस ने दिया स‍ियासी बलिदान?

jyotiraditya Scindia on Kamal Nath Government: केंद्र सरकार में उत्‍तर पूर्वी क्षेत्र व‍िकास मंत्री और मध्य प्रदेश के शिवपुरी-गुना से भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक बार फिर वो वक्त याद आ गया, जब उन्होंने हाथ का साथ छोड़ा तो एमपी में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का तख्तापलट हो गया था. करीब 6 साल बाद अब सिंधिया ने कांग्रेस की सरकार गिराने में स‍ियासी बलिदान देने वाले नेताओं के नाम गिनाए और साथ देने वालों की जमकर तारीफ भी की.

सिंधिया शिवपुरी जिले के पिछोर में जाटव समाज के सम्मेलन में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आज मुझे गर्व है कि जब साल 2018 में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ ने सिंधिया परिवार के मुखिया को ललकारा था, तब जाटव समाज के लोग हमारे साथ खड़े नजर आए.

मंच पर मौजूद शिवपुरी भाजपा जिलाध्यक्ष और करेरा से पूर्व विधायक जसवंत जाटव को योद्धा बताते हुए सिंधिया ने कहा कि आज के जमाने में कोई सरपंच अपने पद से तक इस्तीफा नहीं देता. जसवंत जाटव ने तो विधायकी छोड़ दी थी. इतना कहते ही सिंधिया ने उनके राजनीतिक बलिदान के लिए जमकर तालियां बजवाईं. 

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इस्तीफा देने वालों में जाटव समाज से 3 कैबिनेट मंत्री

सिंधिया ने कहा कि उस वक्त केवल जसवंत जाटव ने ही नहीं, बल्कि कुल 6 कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफा दिया था. इन छह कैबिनेट मंत्रियों में से तीन जाटव समाज से थे. ये तीन कैबिनेट मंत्री इमरती देवी (डबरा), प्रभुराम चौधरी (सांची-रायसेन) और तुलसी सिलावट (सांवेर-इंदौर) थे. इसलिए मैं इस समाज के सामने नतमस्तक हूं और सभी को प्रणाम करता हूं.

सिंधिया ने कहा कि मैं विश्वास दिलाता हूं कि मुरैना के कमलेश जाटव, करेरा के जसवंत जाटव, गोहद के रणवीर जाटव, इमरती देवी डबरा, प्रभुराम चौधरी सांची, तुलसी सिलावट सावेर और रक्षा सिरोनिया दतिया, सभी ने मेरा साथ दिया. मैं इतना कहना चाहता हूं कि भले ही जन्म से नहीं, मगर दिल से तो मैं आपके समाज का ही हूं. 

सिंधिया ने कैसे गिराई थी कमलनाथ की सरकार?

मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं. बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है. साल 2003 से लेकर 2018 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार रही. इस दौरान उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री रहे. इस दौर में ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे. वे गुना लोकसभा सीट से 2002, 2004, 2009 और 2014 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए.

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई. कांग्रेस ने 114 सीटें, भाजपा ने 109 सीटें, बसपा ने 2, सपा ने 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 4 सीटें जीती थीं. तब 1993 से 1998 तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह की जगह कमलनाथ को पहली बार मुख्यमंत्री बनाया गया. कांग्रेस ने बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से सरकार बनाई थी.

दिसंबर 2018 में बनी कमलनाथ सरकार और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच राजनीतिक रिश्ते धीरे-धीरे बिगड़ते चले गए. मार्च 2020 आते-आते सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और उनके साथ कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी हाथ का साथ छोड़ दिया.

सिंधिया के साथ कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों में 6 कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे, जिनका जिक्र 10 जनवरी 2026 को शिवपुरी जिले के पिछोर में जाटव समाज के सम्मेलन में सिंधिया ने किया.

इन इस्तीफों के बाद कमलनाथ सरकार के पास विधायकों की संख्या घटकर 92 रह गई और सरकार अल्पमत में आ गई, क्योंकि बहुमत के लिए 116 विधायकों की जरूरत थी. ऐसे में फ्लोर टेस्ट में कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट हो गया. इसके बाद सिंधिया और उनके समर्थक विधायक भाजपा में शामिल हो गए और शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी. तब से कांग्रेस की सत्ता में वापसी नहीं हो पाई है. 

 

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