International Labour Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर मध्यप्रदेश की श्रम नीतियों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि योजना से लेकर क्रियान्वयन तक श्रमिक हितों को केंद्र में रखा गया है. असंगठित क्षेत्र के पंजीयन, आर्थिक सहायता, पारदर्शी वेतन भुगतान और बच्चों की शिक्षा पर जोर सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है. संबल योजना से लेकर श्रमोदय विद्यालयों तक, राज्य में श्रमिक कल्याण की रूपरेखा अब केवल सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा का दावा भी करती है.
क्यों 1 मई को मनाया जाता है श्रमिक दिवस?
दुनिया भर के मेहनतकश श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक योगदान को याद करने और उनके सम्मान का दिन है अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस. हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन मजदूरों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है. इस दिन को कई देशों में सार्वजनिक छुट्टी के रूप में मनाया जाता है. इसकी जड़ें 19वीं शताब्दी के अंत में अमेरिका में शुरू हुए श्रमिक आंदोलनों से जुड़ी हैं. उस समय औद्योगिक कारखानों में मजदूरों से 12 से 16 घंटे तक काम लिया जाता था. इससे तंग आकर मजदूरों ने आठ घंटे के काम के समय की मांग को लेकर बड़े आंदोलन शुरू किए.
1889 में पेरिस में हुई समाजवादी दलों की अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस (सेकेंड इंटरनेशनल) ने 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया. इसका उद्देश्य आठ घंटे काम का अधिकार दिलाना था. 1890 से दुनिया के कई देशों में यह दिन धूमधाम से मनाया जाने लगा.

International Labour Day 2026: श्रमिक दिवस
भारत में पहली बार कब हुआ आयोजन?
भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1 मई 1923 को चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में मनाया गया. कम्युनिस्ट नेता मलयापुरम सिंगारवेलु चेट्टियार ने हिंदुस्तान मजदूर किसान पार्टी की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया. इस मौके पर लाल झंडा पहली बार भारत में फहराया गया. सिंगारवेलु चेट्टियार ने सरकार से इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की थी. भारत में इस दिन को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस, कामगार दिवस या मजदूर दिवस के नाम से जाना जाता है.
संबल योजना का विस्तार: गिग वर्कर्स तक कवरेज
संबल योजना के तहत अब तक 1.80 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का पंजीयन हो चुका है. 8 लाख से ज्यादा मामलों में ₹7720.07 करोड़ की सहायता दी गई है. हाल ही में योजना में गिग वर्कर्स को भी शामिल किया गया है.
पारदर्शी वेतन और श्रम कानूनों में बदलाव
DBT और बैंक/चेक के जरिए वेतन भुगतान को अनिवार्य कर पारदर्शिता बढ़ाई गई है. सवैतनिक अवकाश के लिए अनिवार्य कार्यदिवस 240 के बजाय 180 किए गए हैं और सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है.
पंजीयन और संरक्षण की तस्वीर
ई-श्रम पोर्टल पर 1.93 करोड़ से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं. 14 वर्ष तक बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध और 18 वर्ष तक खतरनाक उद्योगों में काम पर रोक लागू है.
शिक्षा, आवास और भविष्य की तैयारी
श्रमोदय आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, आवास और रियायती भोजन की सुविधा दी जा रही है. श्रमिकों के बच्चों को JEE/NEET, रक्षा सेवाओं और उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिल रहा है, साथ ही विश्राम गृह और स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
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