Judicial Inquiry: इंदौर पेयजल त्रासदी की होगी न्यायिक जांच, आयोग चार हफ्ते में सौंपगी अंतरिम रिपोर्ट

Bhagirathpura Contaminated Water Death: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुए मौतों के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय को बताया था कि महीना भर पहले भागीरथपुरा इलाके में ​​​​​​​हुई 16 मौतों की वजह दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त का प्रकोप हो सकता है. 

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MP HIGH COURT ORDER JUDICIAL INQUIRY IN INDORE CONTAMINATED WATER DEATH CASE
इंदौर:

Judicial Inquiry: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में कई लोगों की मौत के मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में एक सदस्यीय जांच आयोग गठन किया है, जो चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी.

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से हुए मौतों के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय को बताया कि महीना भर पहले भागीरथपुरा इलाके में हुई 16 मौतों की वजह दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त का प्रकोप हो सकता है. 

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 चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश

रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि ‘एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण' द्वारा इस मामले की 'तुरंत न्यायिक जांच' किए जाने की आवश्यकता है. कोर्ट ने न्यायिक आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया.

दूषित पेयजल से जुड़ी याचिकाएं सुनने के बाद दिया आदेश

गौरतलब है मंगलवार को माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई करते हुए सभी संबद्ध पक्षों को सुना और देर रात अपना आदेश दिया.

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उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा कि आरोपों की गंभीरता और पेयजल त्रासदी के कारण लोगों के जीवन के अधिकार पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए हाई कोर्ट की राय है कि इस मामले में एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण द्वारा जांच की आवश्यकता है

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MP हाई कोर्ट के पूर्व जज को बनाया गया आयोग प्रमुख

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगल पीठ ने कहा,‘‘हम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को इंदौर के भागीरथपुरा में पेयजल के दूषित होने से संबंधित विषयों और शहर के अन्य क्षेत्रों पर इसके प्रभाव की छानबीन के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग के प्रमुख के रूप में नियुक्त करते हैं.

मौत के आंकड़े व संबंधित बिंदुओं पर जांच करेगा आयोग

हाई कोर्ट द्वारा गठित आयोग पेयजल के दूषित होने के स्रोत, इसके सेवन से लोगों की मौत की वास्तविक संख्या और अन्य संबंधित बिंदुओं पर जांच करेगा. आयोग पहली नजर में जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की पहचान और उनकी जिम्मेदारी तय करेगा और प्रभावित नागरिकों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मुआवजे के लिए दिशा-निर्देश भी सुझाएगा.

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गठित आयोग के पास अधिकारियों व गवाहों को तलब करने, सरकारी विभागों, अस्पतालों, प्रयोगशालाओं व नगरीय निकायों से रिकॉर्ड मंगवाने, मान्यता प्राप्त लैब के जरिए पानी की गुणवत्ता की जांच का आदेश देने और मौके पर निरीक्षण करने के लिए एक दीवानी अदालत की शक्तियां होंगी.

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दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ दूषित जल का प्रकोप

उल्लेखनीय है भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी दस्त का प्रकोप दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था और अब तक कम से कम 28 लोगों की मौत का दावा किया गया है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में कुल 23 मृतकों के 'डेथ ऑडिट' की रिपोर्ट पेश की गई है. जिसमें से सिर्फ 16 लोगों की मौत का संबंध दूषित पेयजल माना गया है. 

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रिपोर्ट में कहा गया चार मौतों का प्रकोप से संबंध नहीं

शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के पांच विशेषज्ञों की समिति की तैयार रिपोर्ट में कहा गया कि भागीरथपुरा के चार लोगों की मौत का इस प्रकोप से कोई संबंध नहीं है, जबकि इस इलाके के तीन अन्य व्यक्तियों की मृत्यु के कारण को लेकर किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है.

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हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से जानना चाहा कि उसकी रिपोर्ट के पीछे आखिर कौन-सा वैज्ञानिक आधार है? रिपोर्ट के संबंध में प्रदेश सरकार की ओर से इस्तेमाल ‘वर्बल ऑटोप्सी' (मौखिक शव परीक्षण) शब्द पर अचरज जताते हुए कहा कि उसने यह शब्द पहली बार सुना है.

बड़ा आरोप, लोगों की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं हुई

एक याचिकाकर्ता के वकील अजय बागड़िया ने प्रदेश सरकार की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि प्रदेश सरकार ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान लोगों की मौत की निष्पक्ष जांच नहीं की है. उच्च न्यायालय ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति सचेत करने वाली है, क्योंकि इंदौर के पास महू में भी दूषित पेयजल का मामला सामने आया है. 

'कोर्ट में पेश की जाएगी मौत के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट'

जनहित याचिकाओं पर बहस के दौरान प्रदेश सरकार के एक वकील ने कहा कि भागीरथपुरा में लोगों की मौत के कारण को लेकर अदालत के सामने विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी और याचिकाकर्ताओं के वकील इस पर अपना जवाब पेश कर सकते हैं. यह भी जोड़ा कि वह भागीरथपुरा मामले में उच्च न्यायालय के तमाम निर्देशों का पालन कर रही है.

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हाई कोर्ट में पेश की गई स्टेट्स रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान स्थानीय अस्पतालों में कुल 454 मरीजों को भर्ती किया गया,जिनमें से 441 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है और फिलहाल 11 रोगी अस्पतालों में भर्ती हैं.

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'दो-दो लाख के बजाय 10-10 लाख मुआवजा दिया जाए'

याचिकाकर्ताओं के एक अन्य वकील ने उच्च न्यायालय में बहस के दौरान कहा कि भागीरथपुरा के जिन लोगों के बारे में पुष्टि हो चुकी है कि उनकी मौत दूषित पेयजल से हुई है, उनके परिजनों को दो लाख के बजाय 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए. अब तक 20 से ज्यादा मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए का मुआवजा दिया जा चुका है.

51 नलकूपों में पानी दूषित था, ‘ई-कोलाई' की भी मौजूदगी

अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद इस इलाके के 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई' बैक्टीरिया की मौजूदगी के बारे में पता चला, जिससे भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए. यही नहीं, पाइपलाइन में रिसाव के कारण पेयजल में एक शौचालय के सीवर का पानी भी मिला था.

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