इंदौर में पश्चिम रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसानों का आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप लेता नजर आया. अपनी जमीन के बदले बेहतर मुआवजा और गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की मांग को लेकर हजारों किसान ट्रैक्टर और वाहनों के साथ भोपाल के लिए रवाना हुए. किसानों का कहना है कि उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा.
इस बीच किसानों के भोपाल कूच को रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखाई. हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने दो बार रेड चिली आंसू गैस छोड़ी और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
भोपाल कूच के लिए किसानों का प्रदर्शन
दरअसल, पश्चिम रिंग रोड परियोजना से प्रभावित किसान रविवार को इंदौर के ग्रामीण क्षेत्र शिप्रा से बड़ी संख्या में एकत्र हुए. यहां से किसानों ने भोपाल तक ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया. रैली में 39 गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया. आंदोलनकारियों के साथ करीब 800 ट्रैक्टर और सैकड़ों चार पहिया वाहन शामिल रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में किसानों की बड़ी मौजूदगी दिखाई दी.
करणी सेना के नेतृत्व में हो रहा आंदोलन
इस प्रदर्शन का नेतृत्व करणी सेना कर रही है. संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है. प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात रखना चाहते हैं ताकि प्रभावित किसानों को न्याय मिल सके.
चार गुना मुआवजा देने की मांग
किसानों की सबसे बड़ी मांग अधिग्रहित जमीन का चार गुना मुआवजा है. उनका आरोप है कि वर्तमान में जो मुआवजा दिया जा रहा है, वह जमीन की वास्तविक कीमत के मुकाबले काफी कम है. इसके अलावा किसान गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की भी मांग कर रहे हैं
पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का किया इस्तेमाल
किसानों के बढ़ते हुजूम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दो बार रेड चिली आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके साथ ही वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया. पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करती रही.
पश्चिम रिंग रोड परियोजना पर फिर गरमाई सियासत
पश्चिम रिंग रोड परियोजना को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ है. प्रभावित किसान लगातार मुआवजा बढ़ाने और जमीन अधिग्रहण की शर्तों में बदलाव की मांग कर रहे हैं. किसानों के इस बड़े प्रदर्शन के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विपक्ष भी किसानों की मांगों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है.
आंदोलन में शामिल किसानों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. किसानों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन भी किया जा सकता है.