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OBC महासभा के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, भोपाल में विधानसभा घेरने निकले तो पुलिस ने की पानी की बौछार

20 जुलाई से शुरू हो रहे MP विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन में जमकर हंगामा हुआ. वहीं, सदन के बाहर प्रदर्शन करने के लिए मार्च कर रहे ओबीसी महासभा के लोगों को पुलिस ने रोक लिया.

OBC महासभा के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, भोपाल में विधानसभा घेरने निकले तो पुलिस ने की पानी की बौछार
प्रदर्शनकारियों को रोकती पुलिस.
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27 प्रतिशत आरक्षण लागू कराने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड फ्री करने के लिए सड़क पर उतरे OBC महासभा के कार्यकर्ताओं पर जमकर वॉटर कैनन चला. भोपाल में विधानसभा घेरने निकले OBC महासभा के कार्यकर्ताओं को रोशनपुरा चौराहे पर ही गिरफ्तार कर लिया गया. भोपाल में प्रदर्शन कर रहे यह प्रदर्शनकारी पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए हैं. इनकी मांग है कि सरकार अपना किया वादा निभाए और इन्हें 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करें और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड फ्री करें.

रोशनपुरा पर सभा के बाद जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़े पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जब यह नहीं माने तो फिर पुलिस ने भी जमकर वाटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए इन्हें मौके से तितर-बितर करने की कोशिश की. वहीं, मौके पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार और सचिन यादव भी पहुंचे. उमंग सिंघार ने इसे सरकार की दोहरी मानसिकता बताया. पुलिस की बार-बार चेतावनी के बावजूद भी जब प्रदर्शनकारी मौके से नहीं हटे तो पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया.

क्या है मामला

दरअसल, यह  MP के सबसे बड़े भर्ती पेंच की कहानी है. 27% OBC आरक्षण और 87:13 फॉर्मूले की. मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया गया था. मामला कोर्ट में अटका है. जब तक फैसला नहीं आता, सरकार ने 87:13 फॉर्मूला लगाया है.

जिसमें 87% पदों पर रिजल्ट निकाल कर नियुक्ति दे दी गई. 13% पद (करीब 11,000 पद) होल्ड पर रखे हैं. ये ही OBC के बढ़े हुए 13% वाले पद हैं. इसी वजह से हजारों चयनित अभ्यर्थी सालों से नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं. फैसला इन 11 हजार कैंडिडेट्स का नहीं, बल्कि MP की पूरी भर्ती और आरक्षण नीति का भविष्य तय करेगा.

क्या बोले धर्मेंद्र कुशवाहा

ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा के अनुसार, मध्य प्रदेश में भी 'पिछड़ा वर्ग लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है. लेकिन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया जा रहा है.' आरोप है कि वर्ष 2019 से आरक्षण से जुड़े मामले लगातार लंबित रखे गए हैं, जिससे ओबीसी वर्ग के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है.

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