Indore EV Fire Case: इंदौर में बुधवार तड़के सुबह एक भयावह हादसे ने इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. एक इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान लगी आग ने कुछ ही मिनटों में तीन मंजिला मकान को मौत के घर में बदल दिया. इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू है एक साथ कई अपनों का खो जाना. बिहार के किशनगंज से आए रिश्तेदार इलाज के लिए इंदौर आए थे, लेकिन जिंदा वापस नहीं लौट पाए. बीमारी से जूझ रहे विजय सेठिया, उनकी पत्नी, बेटा, बहन और बहनोई, सब इस हादसे में काल का ग्रास बन गए. स्थानीय लोगों ने कहा कि “कुछ मिनट पहले तक घर में हंसी‑खुशी थी और फिर सब कुछ खत्म हो गया.” यह हादसा एक चेतावनी है कि तकनीक जितनी सुविधाजनक होती जा रही है, अगर सुरक्षा मानकों को नज़रअंदाज़ किया गया, तो उतनी ही खतरनाक भी बन सकती है. इंदौर का यह हादसा सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि कई परिवारों की पूरी दुनिया जला गया.

Indore EV Fire Case: इंदौर आग त्रासदी
आधी रात का हादसा: घर में चार्ज हो रही थी EV कार
घटना बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वर कॉलोनी की है. मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 3:30 से 4 बजे के बीच घर के अंदर खड़ी टाटा पंच EV चार्ज हो रही थी. शुरुआती जांच के मुताबिक, चार्जिंग पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे अचानक चिंगारी निकली और कार में आग लग गई.
Indore, Madhya Pradesh: Seven people died when a fire broke out in a three-storey house in the Tilak Nagar area of Indore pic.twitter.com/7SsM926ayD
— IANS (@ians_india) March 18, 2026
लिथियम‑आयन बैटरी और ‘थर्मल रनअवे' बना बड़ा खतरा
इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम‑आयन बैटरियां अत्यधिक ऊर्जा घनत्व रखती हैं. एक बार आग लगने पर यह तेजी से “थर्मल रनअवे” की स्थिति में पहुंच जाती हैं, जिसमें बैटरी खुद ही लगातार गर्म होती रहती है और आग को और भड़काती है. यही वजह रही कि कुछ ही मिनटों में पूरी कार आग की चपेट में आ गई.
कार से घर तक फैल गई आग, सीढ़ियां बनीं मौत का रास्ता
देखते ही देखते आग कार से निकलकर घर के ग्राउंड फ्लोर से सीढ़ियों के रास्ते ऊपर की मंजिलों तक पहुँच गई. हादसे के वक्त घर में करीब 12 लोग मौजूद थे, जिनमें 6 लोग बिहार के किशनगंज से आए मेहमान थे.
8 लोगों की मौत, 4 की हालत गंभीर
इस दर्दनाक हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. मृतकों में अधिकांश वे लोग थे, जो गहरी नींद में थे और आग तेजी से फैलने के कारण बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके.
SOP तैयार होगी
इंदौर पुलिस कमिश्नर के अनुसार, शुरुआती जांच में EV चार्जिंग पॉइंट हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है. वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने हादसे को “अलार्मिंग” बताया और एक्सपर्ट कमेटी बनाकर SOP तैयार करने की बात कही है.
तेजी से बढ़ रहे EV, बढ़ रहे खतरे भी
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025 तक देश में 20 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हो चुके हैं. हालांकि, इसके साथ ही EV आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं. 2022 से 2025 के बीच देश में 150 से ज्यादा EV फायर केस सामने आए, जिनकी मुख्य वजह बैटरी ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट और खराब चार्जिंग सिस्टम मानी गई.
EV चार्जिंग: क्या हमारे घर सुरक्षित हैं?
इस हादसे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जैसे क्या घरों में EV चार्जिंग के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? क्या लोकल लेवल पर लग रहे चार्जिंग सेटअप्स तय मानकों का पालन कर रहे हैं?
इलाके में अफरा‑तफरी, धमाकों से दहशत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा‑तफरी मच गई. तेज धमाकों और धुएं के गुबार ने लोगों को दहशत में डाल दिया. कई लोग अपने घर छोड़कर सड़कों पर आ गए.
गैस सिलेंडर, केमिकल और डिजिटल लॉक; कैसे बना मौत का जाल
इंदौर हादसे में सिर्फ एक कार नहीं जली, बल्कि घर के अंदर मौजूद खतरनाक संयोजन ने इसे एक “डेथ ट्रैप” में बदल दिया. पुलिस जांच के अनुसार, जैसे ही कार में आग लगी, वह तेजी से घर के अंदर फैल गई और वहां रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया. घर में 10 से ज्यादा गैस सिलेंडर मौजूद थे. आग के संपर्क में आते ही एक के बाद एक सिलेंडर फटते चले गए, जिससे मकान का एक हिस्सा ढह गया.
CM ने दिए जांच के आदेश
इंदौर में इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से हुई दुर्घटना से नई चुनौती सामने आई है। इसकी गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को व्यवस्थित जांच के निर्देश दिए हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने एवं जागरूकता की दिशा में हम कार्य करेंगे।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 18, 2026
डिजिटल लॉक जैसी सुविधाओं का उपयोग हमारी आवश्यकता है, लेकिन इसके…
ज्वलनशील केमिकल बने आग का ‘फ्यूल'
घर में पॉलीमर कारोबार से जुड़े ज्वलनशील केमिकल भी रखे थे. फायर सेफ्टी डेटा के अनुसार, केमिकल‑फेड आग सामान्य आग से 3 से 5 गुना तेजी से फैलती है, जिससे इस हादसे की भयावहता कई गुना बढ़ गई.
डिजिटल लॉक बना सबसे बड़ा दुश्मन
इस हादसे का सबसे खतरनाक पहलू रहा, डिजिटल लॉक सिस्टम. घर में लगे इलेक्ट्रॉनिक लॉक बिजली पर निर्भर थे. जैसे ही आग के कारण बिजली सप्लाई ठप हुई, दरवाजे अपने आप लॉक हो गए और खुल नहीं पाए. अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन तकनीक ही उनके लिए मौत का जाल बन गई.
फायर ब्रिगेड देर से पहुंचने के आरोप
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि सूचना देने के करीब एक घंटे बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची. जबकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार, किसी भी शहरी इलाके में 10 से 15 मिनट के अंदर फायर रिस्पॉन्स होना चाहिए. देरी ने नुकसान को कई गुना बढ़ा दिया.
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