IAS Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारी इन दिनों खासा चर्चा में हैं. एक ओर IAS आदित्य सिंह, जिनका नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में बेहतरीन कार्य के लिए अवॉर्ड के लिए चुना गया, तो दूसरी ओर IAS साकेत मालवीय, जिन्होंने वही अवॉर्ड ग्रहण किया. इसकी वजह है अशोकनगर जिला कलेक्टर पद से जुड़ा पूरा घटनाक्रम.
SIR में आदित्य सिंह का शानदार प्रदर्शन
दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान IAS आदित्य सिंह के नेतृत्व में अशोकनगर जिला पूरे मध्य प्रदेश में सबसे पहले 100 फीसदी डिजिटलीकरण हासिल करने वाला जिला बना. इसी उल्लेखनीय उपलब्धि के चलते आदित्य सिंह का चयन अशोकनगर जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में अवॉर्ड के लिए किया गया.

भोपाल में 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह को संबोधित करते राज्यपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल.

अवॉर्ड IAS आदित्य सिंह की जगह IAS साकेत मालवीय को अवार्ड
जब अशोकनगर जिला निर्वाचन अधिकारी के अवॉर्ड की बारी आई, तो यह सम्मान IAS आदित्य सिंह की बजाय IAS साकेत मालवीय को प्रदान किया गया. दरअसल, SIR में उत्कृष्ट कार्य के लिए अवॉर्ड का चयन तो आदित्य सिंह का हुआ था, लेकिन अवॉर्ड वितरण से पहले उनका अशोकनगर जिला कलेक्टर पद से तबादला हो गया. उनके स्थान पर IAS साकेत मालवीय को अशोकनगर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया, इसी वजह से अवॉर्ड उन्होंने ग्रहण किया.
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कौन हैं IAS आदित्य सिंह?
मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के IAS अधिकारी आदित्य सिंह का जन्म 8 मार्च 1990 को रीवा में हुआ. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रीवा के ज्योति हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की. IIT की तैयारी के लिए वे दो साल कोटा में रहे और 11वीं-12वीं की पढ़ाई DAV स्कूल, कोटा से पूरी की.
साल 2008 से 2012 तक उन्होंने IIT रुड़की से BTech किया. इसके बाद दिल्ली में UPSC की तैयारी कर वर्ष 2014 में पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 47वीं रैंक हासिल कर IAS बने.
IAS बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग टीकमगढ़ जिले के जतारा में SDM के रूप में हुई. इसके बाद वे मंदसौर और होशंगाबाद जिला पंचायत के CEO रहे. भोपाल स्मार्ट सिटी के CEO, गुना में ADM और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में उप सचिव के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई. पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद उन्हें हरदा जिले का कलेक्टर बनाया गया, जहां वे फरवरी 2024 से अप्रैल 2025 तक पदस्थ रहे. इसके बाद वे अशोकनगर जिला कलेक्टर बने.