रिश्वतखोरी के खिलाफ शिकायत कर एक पुलिस अधिकारी को रंगे हाथों पकड़वाने वाला फरियादी अब खुद कानूनी मुश्किलों में फंस गया है. ग्वालियर की एक विशेष अदालत ने माना कि सुनवाई के दौरान फरियादी ने अपने ही पुराने बयान से पलटकर आरोपी को बचाने की कोशिश की. कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए फरियादी के खिलाफ झूठी गवाही देने का केस चलाने के निर्देश दिए हैं.
रिश्वत की शिकायत के बाद हुई थी कार्रवाई
मामला भितरवार थाना क्षेत्र से जुड़ा है. अभियोजन के अनुसार, करहिया गांव निवासी राकेश चौधरी ने 11 मार्च 2016 को लोकायुक्त एसपी से शिकायत की थी. उसने आरोप लगाया था कि भितरवार थाने में पदस्थ एएसआई धनीराम शाक्य जब्त की गई ट्रैक्टर-ट्रॉली छोड़ने के बदले 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं.
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त की टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की और एएसआई धनीराम शाक्य को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.
कोर्ट में बदल गए फरियादी के बयान
मामले की सुनवाई के दौरान 24 सितंबर 2018 को जब राकेश चौधरी गवाही देने अदालत पहुंचा, तो उसने अपने पहले दिए गए बयान से अलग बात कही. उसने कोर्ट को बताया कि रिश्वत एएसआई धनीराम शाक्य ने नहीं, बल्कि तत्कालीन थाना प्रभारी संतोष यादव ने मांगी थी.
इतना ही नहीं, राकेश ने यह भी कहा कि जिस वॉयस रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर पेश किया था, वह भी एएसआई की नहीं बल्कि तत्कालीन टीआई की आवाज थी. उसके इस बयान ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया.
अन्य साक्ष्यों के आधार पर हुई सजा
हालांकि फरियादी के बयान बदलने के बावजूद अदालत ने मामले में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों और सबूतों का परीक्षण किया. अदालत ने पाया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पर्याप्त हैं. इसी आधार पर विशेष न्यायालय ने 5 अक्टूबर 2019 को एएसआई धनीराम शाक्य को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी. यानी फरियादी के मुकर जाने के बावजूद आरोपी को सबूतों के आधार पर राहत नहीं मिल सकी.
झूठी गवाही का मामला दर्ज करने की मांग
एएसआई को सजा मिलने के बाद अभियोजन पक्ष ने अदालत से मांग की कि फरियादी राकेश चौधरी के खिलाफ झूठी गवाही देने की कार्रवाई की जाए. अभियोजन का तर्क था कि उसने जानबूझकर अदालत के सामने तथ्य बदलकर पेश किए और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया. इसके बाद अदालत में इस मुद्दे पर अलग से सुनवाई हुई और दोनों पक्षों के तर्क सुने गए.
फरियादी की दलील कोर्ट ने की खारिज
राकेश चौधरी ने अदालत में दलील दी कि जब मुख्य आरोपी को पहले ही सजा मिल चुकी है, तब उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं है. लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने अपने आदेश में कहा कि किसी आरोपी को बचाने के उद्देश्य से जानबूझकर झूठी गवाही देना गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में केवल इसलिए राहत नहीं दी जा सकती कि मुख्य आरोपी को सजा मिल चुकी है.
अब फरियादी पर चलेगा मुकदमा
अदालत ने राकेश चौधरी के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 और 344 के तहत परिवाद तैयार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ग्वालियर को भेजने के निर्देश दिए हैं. अब उसके खिलाफ झूठी गवाही देने और अदालत को गुमराह करने के आरोप में अलग से मुकदमा चलाया जाएगा.