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मढ़ई के 'महल' में वन्यजीवों की नुमाइश, 35 हजारी रिसॉर्ट में कानून की उड़ी धज्जियां

नर्मदापुरम जिले के मढ़ई क्षेत्र स्थित फोरसिथ लॉज में वन विभाग की छापेमारी के दौरान चीतल के सींग, सेही के कांटे और सांप की कांचली बरामद होने पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है. बिना अनुमति वन्यजीवों के अवशेष प्रदर्शित करने पर रिसॉर्ट मैनेजर से पूछताछ जारी है.

मढ़ई के 'महल' में वन्यजीवों की नुमाइश, 35 हजारी रिसॉर्ट में कानून की उड़ी धज्जियां

Forsyth Lodge Wildlife Case: नर्मदापुरम जिले के सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व के मढ़ई क्षेत्र में स्थित लग्जरी रिसॉर्ट ‘फोरसिथ लॉज' वन विभाग के निशाने पर आ गया है. आरोप है कि यहां वन्यजीवों के अंगों को सजावटी सामान की तरह प्रदर्शित किया जा रहा था. रेंजर टीम की छापेमारी में चीतल के सींग, सेही (साही) के कांटे और सांप की कांचली बरामद हुईं. यह मामला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा है और अब रिसॉर्ट प्रबंधन से सख्ती से पूछताछ हो रही है.

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

बागड़ा बफर के रेंजर विलास डोंगरे के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान रिसॉर्ट परिसर में चीतल के चार सींग, सेही के चार कांटे और सांप की दो कांचली बिना अनुमति रखी हुई पाई गईं. विभाग का कहना है कि इन्हें पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रदर्शन में लगाया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है.

रिसॉर्ट की पहचान और संचालन

यह रिसॉर्ट मढ़ई क्षेत्र में अपनी ग्रामीण शैली की थीम और लग्जरी सुविधाओं के लिए मशहूर है. बताया जा रहा है कि करीब 40 एकड़ में फैली इस संपत्ति का संचालन मुंबई से होता है. प्रबंधन से जुड़े पक्षों के नाम सामने आ रहे हैं और विभाग यह पता लगा रहा है कि अवशेष कहां से लाए गए? क्या ये आसपास के जंगलों से जुटाए गए या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है?

कानूनी कार्रवाई और पूछताछ

एसडीओ (वन) आशीष खोपरागढ़े के अनुसार, रिसॉर्ट मैनेजर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. जांच का फोकस यह जानना है कि बरामद अवशेष कितने पुराने हैं और उनकी स्रोत-श्रृंखला क्या है. वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत अवैध कब्जा/प्रदर्शन पर कड़ी सज़ा का प्रावधान है, इसलिए दस्तावेज और अनुमति-पत्रों की भी जांच चल रही है.

वन्यजीवों के अवशेषों को ‘वाइल्डलाइफ फील' देने के नाम पर शो-पीस बनाना न केवल अवैध है, बल्कि संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करता है. ऐसे प्रदर्शन शिकारी नेटवर्क को बढ़ावा दे सकते हैं और पर्यटन के नाम पर गलत संदेश देते हैं. विभाग मानता है कि इस तरह की प्रवृत्ति पर तुरंत रोक लगना आवश्यक है.

प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा

जांच में यदि स्रोत और अनुमति का अभाव साबित होता है, तो रिसॉर्ट प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कसना तय है. विभाग यह भी देख रहा है कि क्या मामले में स्थानीय सप्लाई चैन या बड़े सिंडिकेट का हाथ है.  

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