
Sidhi Government Hospital: कायाकल्प अभियान के तहत जिला चिकित्सालय सीधी (District Hospital Sidhi) का निरीक्षण करने के लिए भोपाल (Bhopal) से गठित होकर एक टीम सीधी पहुंची, जहां निरीक्षण में पाया गया कि अस्पताल में साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाएं बदली-बदली नजर आ रही थीं. लोगों ने कहा कि काश हर रोज अस्पताल की ऐसी ही व्यवस्था रहती तो आधे मरीज अपने आप ठीक हो जाते और उन्हें समय पर स्वास्थ्य लाभ मिल जाता.
अस्पताल में दिखी दिखावे की झलक
जिला अस्पताल में एक दिन के दिखावे के लिए ऐसा इंतजाम किया गया जबकि वास्तविकता यह है कि सीधी जिला अस्पताल समस्याओं से खुद जूझ रहा है. चिकित्सकों की कमी से लेकर आवश्यक उपकरण उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को भी आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. यह बात किसी से छिपी नहीं है. आए दिन मरीजों के साथ सुविधा के नाम पर दुर्व्यवहार किया जाता है. इसके अलावा भर्ती प्रक्रिया सहित अन्य कार्य भी काफी कठिन बनाकर रख दिए गए हैं. जरूरत ना होने पर भी मरीजों को रीवा रेफर कर दिया जाता है.

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टीम की रिपोर्ट पर मिलती है रैंक
कायाकल्प टीम मुख्य रूप से स्वच्छता पर नजर रखती है और इसी टीम की रिपोर्ट पर प्रदेश में अस्पतालों को रैंक दी जाती है. इसी कारण कायाकल्प टीम के आने की जानकारी मिलते ही अस्पताल को सजाया गया. बाहरी परिसर को साफ स्वच्छ रखा गया, सामने खड़े वाहनों को भी एक दिन के लिए बाहर हटा दिया गया. गमले रख दिए गए थे ताकि माना जाए कि अस्पताल की व्यवस्था बेहतर रहती है. सफाईकर्मी भी जगह-जगह झाड़ू-पोछा करते नजर आ रहे थे लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ एक दिन की रही. आने वाले कल से वही पुरानी व्यवस्था फिर से दिखने लगेगी.
बायो मेडिकल वेस्ट के लिए दी हिदायत
अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के लिए कायाकल्प टीम की ओर से कड़ी हिदायत देते हुए कहा गया कि जो मेडिकल वेस्ट निकलता है उसे निश्चित स्थान पर नियमानुसार रखा जाए. इधर-उधर या नालियों में कतई ना फेंका जाए. देखने को मिलता है कि इस कार्य में काफी लापरवाही बरती जाती है, जो ठीक नहीं है.
कई वार्डों का किया गया निरीक्षण
कायाकल्प अभियान के तहत होने वाले एकदिवसीय निरीक्षण का नेतृत्व डॉक्टर सचिन कारखुरे ने किया, जिनके द्वारा जिला अस्पताल परिसर, मुख्य द्वार, डायरेक्शन बोर्ड, ड्रेसिंग रूम, इमरजेंसी सहित अन्य जगह जाकर निरीक्षण किया गया. स्वास्थ्य कर्मियों को हिदायत भी दी गई. वहीं जिम्मेदार अमला सिर्फ हां कहते नजर आया और तरह-तरह के बहाने बनाते भी देखा गया.
चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की कमी से जूझ रहा अस्पताल
सीधी का जिला अस्पताल स्वयं संकट के दौर से गुजर रहा है. यहां चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य स्टाफ की कमी काफी लंबे समय से बनी हुई है जिसकी भरपाई नहीं हो पा रही है. चिकित्सकों के पदस्थापन आदेश जारी होते हैं जिस पर चिकित्सक सीधी आते नहीं और अगर आते भी हैं तो अपनी सुविधानुसार यहां से वह ट्रांसफर करा लेते हैं. ऐसे में वही पुराने डॉक्टर यहां इलाज की कमान संभाले हुए हैं. जिस प्रकार से डॉक्टरों की उपलब्धता होनी चाहिए, वह संभव नहीं हो पा रहा है. इमरजेंसी और अन्य वार्डों में मरीज को डॉक्टर के अभाव की समस्या का सीधे तौर पर सामना करना पड़ता है. रात में तो एक दो डॉक्टर ही सिर्फ उपस्थित रहते हैं. अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो यहां मरीजों को देखने वाला कोई नहीं मिलता है.
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बाजार से दवाइयां खरीदते हैं मरीज
अस्पताल में अन्य सुविधाओं की बात तो दूर जो डॉक्टर दवाइयां लिखते हैं, वह भी मुहैया नहीं हो पाती हैं. मरीज या उनके परिजन बाजार से दवाइयां खरीद करके स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और यह काफी समय से चल रहा है. या तो डॉक्टर यह अपनी सुविधा के लिए कर रहे हैं या फिर अस्पताल में वे दवाइयां नहीं रहतीं जो डॉक्टर लिखते हैं. जिम्मेदारों से भी कई बार बात की गई लेकिन उन्होंने इस बात से किनारा कर लिया. कोई भी सार्थक जवाब देने की स्थिति में नहीं रहता.