Action Against Corruption: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर जिले के रामनगर (Ramnagar) विकासखंड में स्कूलों के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के कथित फर्जी भुगतान मामले में कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है. दरअसल, हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में भवन मरम्मत, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड निर्माण के नाम पर किए गए 4.37 करोड़ रुपये के नियम विरुद्ध भुगतान ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और प्राचार्यों पर निलंबन और नोटिस की कार्रवाई लगातार जारी है.
संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण रीवा संभाग ने बुधवार को तीन प्राचार्यों को नियम विरुद्ध भुगतान के मामले में निलंबित कर दिया, जिन प्राचार्यों को सस्पेंड किया गया है, उनमें संकर्षण प्रसाद पाण्डेय, रवीन्द्र सिंह और किरण पटेल शामिल हैं. दरअसल आरोप है कि शासकीय हाई स्कूल बड़वार की प्राचार्य संकर्षण प्रसाद पाण्डेय पर लगभग 23.24 लाख रुपये का भुगतान वाणी इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर गलत तरीके से करने का आरोप हैं. वहीं, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सगौनी के प्राचार्य रवीन्द्र सिंह पर करीब 24.94 लाख रुपये का भुगतान गलत तरीके से करने का आरोप है. इसके अलावा, शासकीय हाई स्कूल मड़वार प्राचार्य की किरण पटेल पर लगभग 24 लाख रुपये का भुगतान श्री रुद्र इंटरप्राइजेज के नाम पर गलत तरीके करने का आरोप लगा है. लिहाजा, तीनों को निलंबित कर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अमरपाटन से अटैच किया गया है. गौरतलब है कि इससे पहले भी तीन प्राचार्य सस्पेंड किए जा चुके हैं.
सात प्राचार्यों को कारण बताओ नोटिस
इसी मामले में संभागायुक्त रीवा ने सात अन्य प्राचार्यों को शो-कॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इन पर भी संबंधित फर्मों के नाम पर नियम विरुद्ध भुगतान की सहमति देने के आरोप हैं. जिन प्राचार्यों को नोटिस मिला है, उनमें हर्रई, कंदवारी, गोविंदपुर, गुलवार गुजारा, देवराजनगर, देवदहा और गोरसरी के स्कूल प्रमुख शामिल हैं. जवाब संतोषजनक न मिलने पर इन पर भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है.
तीन फर्मों के नाम पर हुआ भुगतान
जांच में सामने आया है कि जिले की लगभग 20 स्कूलों ने वाणी इन्फ्रास्चर, श्री महाकाल ट्रेडर्स और श्री रुद्र इंटरप्राइजेज के नाम पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया. एसडीएम रामनगर द्वारा की गई जांच में कई स्थानों पर निर्माण कार्य जमीनी स्तर पर नहीं मिला या बेहद सीमित पाया गया, जबकि कागजों में पूरा भुगतान दर्शाया गया.
अब तक 9 कर्मचारी निलंबित
इस पूरे मामले में अब तक 9 कर्मचारियों और प्राचार्यों पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है. इसमें विभिन्न स्कूलों के प्राचार्यों के अलावा बीईओ और अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं. प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है तथा आगे और अधिकारियों पर कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा रहा.
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4.37 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या वसूली, आपराधिक प्रकरण और ठेका फर्मों पर भी सख्त कार्रवाई होगी या मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित रहेगा.
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