LPG Price Hike Protest: महंगाई, रसोई गैस और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ मऊगंज में कांग्रेस ने मंगलवार को ऐसा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा. हाथों में जलती लालटेन, साइकिलों के पीछे बंधे खाली गैस सिलेंडर और जुबान पर तीखे नारे इस अनोखे अंदाज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया. प्रदर्शन के दौरान एक ही बात गूंजती रही “हमें अच्छे दिन नहीं चाहिए, बस हमारे पुराने दिन लौटा दो.”
सड़कों पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता
मऊगंज की सड़कों पर सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ता जुटना शुरू हो गए. लालटेन और खाली सिलेंडरों के साथ उन्होंने जुलूस निकाला और महंगाई, गैस की किल्लत और बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन किया. इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिये कार्यकर्ताओं ने यह दिखाने की कोशिश की कि आम आदमी की ज़िंदगी फिर से पुराने दौर की ओर लौट रही है.
‘अच्छे दिन' के नारे पर तंज
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए कहा कि अब उन्हें ‘अच्छे दिन' नहीं चाहिए. उनका कहना था कि पेट्रोल-डीजल, गैस और रोज़मर्रा के सामान की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. लालटेन और साइकिल के पीछे बंधे सिलेंडर इसी पीड़ा का प्रतीक बताए गए.
पूर्व विधायक ने सरकार पर बोला हमला
इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना भी मौजूद रहे. उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ‘अच्छे दिन' के नाम पर जनता को सिर्फ आश्वासन दिए गए हैं. उनका आरोप था कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात का बहाना बनाकर महंगाई थोप दी गई है, जबकि आम लोग बुनियादी जरूरतों के लिए भी परेशान हैं.
गैस और डीजल के लिए लाइनों का जिक्र
पूर्व विधायक ने कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग गैस और डीजल के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी हकीकत से दूर है और आम जनता की तकलीफें समझने को तैयार नहीं है. प्रदर्शन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में महंगाई कम करने, गैस और ईंधन की कीमतों पर राहत देने की मांग की गई.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर हालात यूं ही बने रहे और जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक आम लोगों को राहत नहीं मिलती.