Chhatarpur Deer Rescue: छतरपुर के बाजना वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत शाहगढ़ में बुधवार सुबह अफरा-तफरी मच गई, जब जंगल सिमटने के कारण एक जंगली हिरण रिहायशी इलाके में घुस आया. गांव में प्रवेश करते ही कुत्तों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया. खतरा देखकर बच्चों और ग्रामीणों ने जज्बा दिखाया और हिरण को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित रूप से केरखोरा के जंगल में छोड़ दिया.
हिरण पर हमला और ग्रामीणों की फुर्ती
हिरण जैसे ही बस्ती की ओर भागा, कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया और नोचने लगे. यह देख गांव के बच्चे पहले आगे आए, लेकिन स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीण भी जुट गए. लोगों ने पत्थर और डंडों से कुत्तों को दूर भगाया और मिलकर हिरण को बचाया. थोड़ी देर की मशक्कत के बाद हिरण को बिना चोटिल किए पास के वन क्षेत्र केरखोरा में छोड़ दिया गया.
वन विभाग की देरी पर सवाल
घटना की सूचना डिप्टी रेंजर गेरहू प्रजापति और वन रक्षक मनीष पटेल तक पहुंच गई थी, लेकिन विभाग का अमला करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचा. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अधिकारी पहुंचे, ग्रामीणों और बच्चों ने ही हिरण को सुरक्षित जंगल में पहुंचा दिया था. समय पर मदद न मिलने को लेकर नाराजगी जताई गई.
पुरानी शिकायतें और मिलीभगत के आरोप
गांव वालों के मुताबिक, दो वर्ष पहले भी बाजना वन परिक्षेत्र में शिकारियों द्वारा हिरण का शिकार किए जाने की बात सामने आई थी. तब भी संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई न करने और मामले को दफ्न कर देने के आरोप लगे थे. उस समय यह मुद्दा छतरपुर के CCF नरेश यादव तक पहुंचाया गया था, जिसके बाद कुछ दिन तक सख्ती देखने को मिली. लेकिन अब फिर से मर्जी से काम करने और निर्देशों की अनदेखी के आरोप उठ रहे हैं.
सिकुड़ते जंगल और बढ़ते टकराव
स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में अतिक्रमण और अवैध कटाई लगातार बढ़ रही है. इसी वजह से वन्यजीव खुराक और सुरक्षित आवास की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. कुत्तों के झुंड द्वारा हमला, खेतों में फसल नुकसान और निवासियों की सुरक्षा ये सब मानव-वन्यजीव टकराव के बढ़ते संकेत हैं.