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Success Story: पायलट बनते ही मां को किया वादा निभाया, अब युवाओं को प्रेरित कर रहें कैप्टन निशांत राय

टीकमगढ़-निवाड़ी जिले के पहले पायलट कैप्टन निशांत राय की प्रेरक कहानी युवाओं के लिए मिसाल बन गई है. मां को 12 ज्योतिर्लिंग और चारों धाम के दर्शन कराने का वादा पूरा करने के बाद वे अब बुंदेलखंड के युवाओं को पायलट बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

Success Story: पायलट बनते ही मां को किया वादा निभाया, अब युवाओं को प्रेरित कर रहें कैप्टन निशांत राय

Captain Nishant Rai Success Story: मां से किया वादा निभाना हर बेटे का सपना होता है, लेकिन बुंदेलखंड के कैप्टन निशांत राय ने यह वादा न सिर्फ पूरा किया, बल्कि अपनी सफलता को अपनी धरती के युवाओं तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया है. मां को 12 ज्योतिर्लिंग और चारों धाम के दर्शन कराने के बाद अब वे बुंदेलखंड के युवाओं को पायलट बनने का सपना दिखा रहे हैं और उसे पूरा करने में मदद भी कर रहे हैं. टीकमगढ़–निवाड़ी के पहले पायलट बनने वाले निशांत की कहानी संघर्ष, समर्पण और सफलता की ऐसी उड़ान है, जो हर युवा को प्रेरित करती है.

बुंदेलखंड का पहला पायलट बनकर रचा इतिहास

निवाड़ी निवासी 33 वर्षीय कैप्टन निशांत राय बुंदेलखंड के टीकमगढ़-निवाड़ी जिले के पहले पायलट हैं. बचपन में आसमान को दूर समझने वाले क्षेत्र के बच्चों के लिए उन्होंने नई राह दिखाई है. आज वे न सिर्फ इंडिगो एयरलाइन में सीनियर कैप्टन हैं, बल्कि कंपनी में मैनेजमेंट की जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं.

शिक्षा से शुरू हुई उड़ान की तैयारी

निशांत ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई झांसी के आर्मी स्कूल से की. इसके बाद उन्होंने भोपाल फ्लाइंग क्लब से पायलट ट्रेनिंग ली. वर्ष 2012 में वे पायलट बने और उन्नत प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर और बैंकॉक गए. उनके अनुसार, एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में पायलटों की भारी जरूरत होगी.

अपने परिवार के साथ कैप्टन निशांत.

अपने परिवार के साथ कैप्टन निशांत.

नौकरी के बावजूद परिवार को प्राथमिकता

कैप्टन निशांत का चयन 2015-16 में एयर इंडिया में हो गया था, लेकिन पिता बाबूलाल राय की तबीयत खराब होने के कारण उन्होंने नौकरी ज्वाइन नहीं की. 2018 में फिर उनका चयन एयर इंडिया, जेट एयरवेज और इंडिगो तीनों में हुआ. उन्होंने इंडिगो को चुना और वहां फर्स्ट ऑफिसर से सीनियर कैप्टन तक का सफर तय किया. आज वे इंदौर-दिल्ली बेस के साथ अहमदाबाद और जयपुर संचालन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं.

बुंदेलखंड के युवाओं को दे रहे नई दिशा

निशांत राय ने युवाओं को पायलट बनने की पूरी प्रक्रिया समझाई. उनका कहना है कि जिले के बच्चे किसी से कम नहीं, जरूरत सिर्फ बड़े सपनों की है. उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एविएशन सेक्टर में रोजगार के कई अवसर खुलेंगे और बुंदेलखंड के युवा भी आसानी से आसमान छू सकते हैं.

उड़ान भरने से पहले कैप्टन निशांत राय.

उड़ान भरने से पहले कैप्टन निशांत राय.

पिता का दिया खिलौना आज भी पास है- निशांत 

निशांत बताते हैं कि नौकरी लगते ही उन्होंने संकल्प लिया था कि अपनी मां आशा रानी राय को 12 ज्योतिर्लिंग और चारों धाम के दर्शन कराएंगे. सिर्फ दो वर्षों में उन्होंने यह वचन पूरा किया. अपनी मां के लिए यह सफर बेहद भावुक था. निशांत बचपन की एक याद साझा करते हुए कहते हैं कि 1998 में पिता ने उन्हें एक छोटा उड़ने वाला विमान खिलौना दिया था, जिसे उन्होंने आज भी संभाल कर रखा है और वह अब भी उड़ता है.

'सपना बड़ा रखो, जगह मायने नहीं रखती'

निशांत राय ने बुंदेलखंड के युवाओं से कहा कि बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं है. सपना बड़ा होना चाहिए और मेहनत सच्ची. उन्होंने कहा कि आसमान आपका इंतजार कर रहा है, बस उड़ान भरने का हौसला चाहिए.

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