मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी में शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है्. अस्पताल से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
आरोप है कि सिविल अस्पताल बुधनी में डिलीवरी के बाद दाइयों द्वारा प्रसूता के परिजनों से खुलेआम पैसों की मांग की गई. प्रसूता निशा और उसके परिजनों ने सीएमओ बुधनी अस्पताल से शिकायत की है. बताया गया है कि ड्यूटी पर तैनात दाई ने नवजात शिशु को देने से पहले 4000 रुपये की मांग की. जब परिवार ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई और पूरी राशि देने में असमर्थता जताई तो दाई ने कथित तौर पर बच्चा देने से इंकार कर दिया.
1500 रुपये की व्यवस्था की
मजबूर गरीब परिवार ने जैसे-तैसे 1500 रुपये की व्यवस्था की, तब जाकर उन्हें उनका नवजात शिशु मिला. इस घटना से आक्रोशित परिवार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है. जब इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. बड़ोदिया से बात की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.
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