MP High Court: नियम विरुद्ध हॉस्पिटल्स पर क्या एक्शन हुआ? कोर्ट ने रिपोर्ट्स पेश करने को कहा, जानिए मामला

MP High Court: कोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार को शहर में संचालित नियम विरूद्ध अस्पतालों की कार्यवाही रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर पेश करनी होगी. यह फैसला प्राइवेट अस्पतालों में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

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MP High Court: हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

MP High Court: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय (Madhya Pradesh High Court Jabalpur) की युगलपीठ ने नियम विरुद्ध संचालित अस्पतालों के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ा रुख अपनाया है. इस बेंच में चीफ़ जस्टिस और जस्टिस विवेक जैन शामिल हैं. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि शहर में चल रहे नियम विरुद्ध अस्पतालों की अपडेटेड एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दो सप्ताह के भीतर पेश की जाए. अगस्त 2022 में जबलपुर के न्यू लाइफ अस्पताल में भीषण अग्निकांड में 8 लोगों की मौत के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया. सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को सूचित किया कि विगत दिनों कोठारी अस्पताल और एप्पल अस्पताल का पंजीयन निरस्त किया गया है और अन्य अस्पतालों पर भी कार्रवाई जारी है.

निजी अस्पतालों के नियम विरुद्ध संचालन पर कोर्ट सख्त

यह जनहित याचिका लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा वर्ष 2022 में दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कोरोनाकाल के दौरान बड़ी संख्या में अस्पतालों को नियमों की अनदेखी कर लाइसेंस दिए गए. याचिका में कहा गया कि नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी नियमों, बिल्डिंग कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट, पार्किंग स्पेस और दमकल वाहन के लिए 6 मीटर खुली जगह की अनदेखी कर कई अस्पतालों को अनुमति प्रदान की गई.

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अग्निकांड की जाँच रिपोर्ट पुलिस को सौंपने के आदेश

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि न्यू लाइफ़ अस्पताल को पंजीयन देने से पहले निरीक्षण करने वाले डॉ एलएन पटेल और डॉ निशेष चौधरी को अब तक पुलिस जांच में आरोपी नहीं बनाया गया. जबकि राज्य शासन की जाँच कमेटी ने इन्हें दोषी ठहराया था. हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जाँच कमेटी की रिपोर्ट तत्काल पुलिस को सौंपी जाए ताकि अस्पताल को अनुमति देने वाले सरकारी अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जा सके.

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