भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका विशेष कोर्ट ने खारिज कर दी है. कोर्ट ने आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. शनिवार 25 जुलाई को कोर्ट ने जमानत निरस्त करने का आदेश सुनाया. बता दें कि गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले चार जज खुद को इस केस से अलग कर चुके थे, जिसके बाद यह मामला विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था.
कोर्ट ने फैसला रख लिया था सुरक्षित
24 जुलाई को विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्रा की को अदालत में जमानत अर्जी पर लंबी सुनवाई हुई थी, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था. सुनवाई के दौरान वकील ने तर्क दिया कि गिरिबाला एक वरिष्ठ महिला हैं और उम्र अधिक होने के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं.
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कोर्ट में कहा- लिंग के आधार पर कोई छूट नहीं दे सकते
सीबीआई (CBI) ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि केवल महिला होने के आधार पर राहत देना उचित नहीं होगा, क्योंकि इस मामले में मृतका भी एक महिला ही थी. अतः लिंग के आधार पर कोई छूट नहीं दी जा सकती.
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सीबीआई की इन दलीलों से नहीं मिली जमानत
सीबीआई ने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह पर जांच प्रभावित करने के गंभीर आरोप हैं. उन्होंने मामले से जुड़े सीसीटीवी तकनीशियन और एक सैलून संचालक से संपर्क किया था, उन्होंने फुटेज हासिल करने के लिए अपना निजी प्रतिनिधि भेजा था. सीबीआई ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकती हैं या जांच में बाधा डाल सकती हैं. इन्हीं तमाम तर्कों को सुनने के बाद विशेष कोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया.