
Beggar free Indore: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर देश का ऐसा पहला शहर बन चुका है जिसने भीख मांगने और भीख देने पर प्रतिबंध लगाकर इसे कानूनन अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया है. शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के साथ ही सभी भिक्षुक को पुनर्वास केंद्र भेजा गया और उन्हें रोजगार के साथ जोड़ा गया.
इस मॉडल को अब दूसरे शहर में भी उपयोग किया जाएगा, जिसके लिए भारत सरकार ने देहरादून में चिंतन शिविर आयोजित किया है. यहां इंदौर शहर प्रेजेंटेशन देगा जिसे दूसरे शहर फॉलो कर सकेंगे.
इस विषय में इंदौर के जिला कार्यक्रम अधिकारी रामनिवास भदोरिया ने बताया, "कलेक्टर आशीष सिंह के नाम प्राप्त हुए सामाजिक न्याय के पत्र में उल्लेख किया गया है कि 7 और 8 अप्रैल को देहरादून में एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की जा रही है. इस कार्यशाला में देश के प्रथम भिक्षुक मुक्त शहर में क्या कार्य योजनाएं बनाई गई और क्या कार्रवाई की गई उस पर एक प्रेजेंटेशन देने की बात की है."
देश के सभी राज्य होंगे शामिल
कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि इंदौर में सभी के प्रयासों से शहर भिक्षुक मुक्त बन पाया है. पूरी कार्रवाई में एक मानवीय तरीके से सभी को पुनर्वास केंद्र भेजा गया,रोजगार से जोड़ा गया और छोटे बच्चों को शिक्षा भी प्रदान की गई. इंदौर ने यह साबित कर दिया है कि कोई शहर शत-प्रतिशत ढंग से भिक्षुक मुक्त हो सकता है. अभी फिलहाल मध्य प्रदेश के दूसरे शहर इस मॉडल को फॉलो कर रहे हैं और अब जल्द पूरे देश में यह मॉडल लागू किया जाएगा.
मध्य प्रदेश और इंदौर के लिए यह गर्व की बात है कि जो मॉडल इंदौर को भिक्षुक मुक्त बनाने में कारगर साबित हुआ वही मॉडल अब देशभर में लागू किया जाएगा.
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