बैगा एक विशिष्ट जनजाति, उसके अधिकारों की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य : हाई कोर्ट

बालाघाट के रहने वाले हरेसिंह मरकाम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसकी जमीन पर पुलिस ने कब्जा कर पुलिस चौकी का निर्माण कर लिया है. उसकी जमीन पर टॉवर भी लगा दिए गए हैं, जिसके चलते उसकी बाकी की जमीन भी बेकार हो गई है.

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बैगा जनजाति को लेकर हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की

Baiga Tribes in MP: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने बैगा जनजाति (Baiga Tribe) के याचिकाकर्ता की जमीन बगैर अधिग्रहण कब्जा करने पर सरकार (MP Government) पर नाराजगी जताई है. अपने आदेश में जस्टिस विवेक अग्रवाल (Justice Vivek Agarwal) की एकलपीठ ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर विचार कर उचित आदेश पारित किया जाए. बैगा जैसी विशिष्ट जनजाति के अधिकारों की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. 

क्या है पूरा मामला?

बालाघाट के रहने वाले हरेसिंह मरकाम ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसकी जमीन पर पुलिस ने कब्जा कर पुलिस चौकी का निर्माण कर लिया है. उसकी जमीन पर टॉवर भी लगा दिए गए हैं, जिसके चलते उसकी बाकी की जमीन भी बेकार हो गई है. याचिकाकर्ता ने बताया कि इस बाबत उसने कई मर्तबा अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. याचिका में दलील दी गई कि बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए बैगा आदिवासी की जमीन पर सरकार ने ही कब्जा कर लिया है. 

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अदालत ने क्या दिए निर्देश?

अदालत ने याचिका की सुनवाई के बाद प्रमुख सचिव गृह विभाग को यह आदेश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर प्रमुख सचिव जिला कलेक्टर को अभ्यावेदन प्रस्तुत करें. याचिकाकर्ता विशिष्ट जनजाति का है इसलिए उसके अभ्यावेदन पर समग्र दृष्टिकोण से विचार कर उस पर निर्णय पारित करें. अदालत ने अंतिम आदेश पारित करने के बाद याचिकाकर्ता को इससे अवगत कराने के लिए भी कहा है.

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