पश्चिम बंगाल के बाद अब MP में भी CBI बिना अनुमति के जांच नहीं कर सकेगी, नोटिफिकेशन जारी

CBI Investigation: मध्य प्रदेश सरकार का नया आदेश 1 जुलाई से प्रभावी रहेगा. सीबीआई को राज्य सरकार से लिखित में अनुमति लेनी होगी. इसके बाद ही निजी सरकारी और अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई जांच होगी.

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CBI Investigation: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) से इस समय बड़ी खबर (Breaking News) आ रही है. पश्चिम बंगाल (West Bangal) के बाद अब मध्यप्रदेश (CBI Investigation in MP) में भी सीबीआई (CBI) बिना अनुमति जांच नहीं कर सकेगी. CBI को जांच के पहले मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) की अनुमति लेनी होगी. इस बारे में राज्य सरकार ने अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है. राज्य सरकार के फैसले के बाद गृह विभाग के सेक्रेटरी गौरव राजपूत ने आदेश जारी कर दिया है. सरकार का नया आदेश एक जुलाई से प्रभावी रहेगा. सीबीआई को राज्य सरकार से लिखित में अनुमति लेनी होगी.  इसके बाद ही निजी सरकारी और अन्य लोगों के खिलाफ सीबीआई जांच होगी.

सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में क्या लिखा है?

इसमें लिखा है कि दिल्ली विशेष पुलिस (Delhi Special Police) स्थापना अधिनियम, 1946 (1946 का 25) की धारा 6 के अनुसरण में, मध्यप्रदेश शासन, कथित तौर पर केन्द्र सरकार, केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों द्वारा किए गए (चाहे वे अलग से काम कर रहे हों या केन्द्र सरकार / केन्द्र सरकार के उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर), समय-समय पर यथासंशोधित उक्त अधिनियम की धारा 3 के अधीन अधिसूचित अपराधों या अपराधों की श्रेणियों की जांच के लिए सम्पूर्ण मध्यप्रदेश राज्य में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के विस्तार के लिए अपनी सहमति प्रदान करता है.

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अतएव, उक्त अधिनियम की धारा 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, मध्यप्रदेश शासन द्वारा नियंत्रित लोक सेवकों से संबंधित मामलों में, ऐसी कोई जांच राज्य सरकार की पूर्व लिखित अनुमति के बिना नहीं की जाएगी. किन्हीं भी अन्य अपराधों के लिए पिछली सभी सामान्य सहमति और राज्य सरकार द्वारा किसी अन्य अपराध के लिए मामले-दर-मामले के आधार पर दी गई सहमति भी लागू रहेगी. यह अधिसूचना दिनांक 1 जुलाई, 2024 से प्रवृत्त हुई समझी जाएगी.

बंगाल सरकार द्वारा संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. जिसमें उसमें कहा है कि केंद्रीय एजेंसी से राज्य द्वारा सहमति वापस लेने के बावजूद CBI कई मामलों में जांच कर रही है.

BNS का दिया गया हवाला

गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद उसके अनुपालन के लिये यह नोटिफिकेशन जारी करना जरूरी था. इसलिए ये गजट नोटिफिकेशन हुआ है. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी शासित दूसरे राज्यों में भी भारतीय न्याय संहिता लागू होने की वजह से ये नोटिफिकेशन लागू होगा.
 

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