शिवपुरी जिले में 108 एंबुलेंस सेवा की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस रास्ते में दो बार खराब हो गई. आरोप है कि दूसरी बार गाड़ी बंद होने के बाद चालक ने महिला और उसके परिजनों को राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर ही छोड़ दिया. अंधेरी रात में दर्द से कराहती महिला करीब आधे घंटे तक सड़क किनारे मदद का इंतजार करती रही. आखिरकार एक राहगीर ने मानवता दिखाते हुए अपनी कार से महिला को अस्पताल पहुंचाया.
प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंची थी महिला
जानकारी के मुताबिक, खोड़ चौकी क्षेत्र के बुरानपुर गांव निवासी राजेश लोधी की 20 वर्षीय पत्नी खुशबू लोधी को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिजन उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोड़ लेकर पहुंचे. खुशबू की यह पहली डिलीवरी थी. स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल शिवपुरी जिला अस्पताल रेफर कर दिया.
जिला अस्पताल के लिए रवाना हुई 108 एंबुलेंस
महिला को जिला अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस मौके पर बुलाई. परिजन प्रसूता को लेकर शिवपुरी के लिए रवाना हो गए. शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन कुछ दूरी तय करने के बाद एंबुलेंस में तकनीकी खराबी आ गई. पहली बार किसी तरह वाहन को दोबारा चलाया, लेकिन आगे जाकर परेशानी और बढ़ गई.
हाईवे पर दूसरी बार बंद हुई एंबुलेंस
सुरवाया थाना क्षेत्र के अंतर्गत NH-27 पर एंबुलेंस दूसरी बार पूरी तरह बंद हो गई. आरोप है कि इस स्थिति में चालक ने न तो दूसरी एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था का इंतजाम किया. प्रसव पीड़ा से बेहाल महिला और उसके परिजनों को हाईवे किनारे छोड़ दिया.
रात के समय हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच महिला दर्द से कराहती रही. परिवार के लोग मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी. करीब आधे घंटे से अधिक समय तक परिवार सड़क किनारे मजबूरी में खड़ा रहा. इस दौरान महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना रहा.
राहगीर ने दिखाई इंसानियत
जब परिवार मुश्किल में फंसा हुआ था, तब हाईवे से गुजर रहे एक कार चालक ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया. उसने अपनी कार में प्रसूता को बैठाया और जिला अस्पताल पहुंचाया. समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण महिला और नवजात की जान बच सकी. परिजनों का कहना है कि यदि उस समय राहगीर मदद के लिए नहीं रुकता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी.
परिजनों ने की कार्रवाई की मांग
घटना से नाराज परिजनों ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है. उनका कहना है कि आपातकालीन सेवा की ऐसी लापरवाही किसी भी मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है. परिवार ने एंबुलेंस चालक और जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के आदेश
मामले का वीडियो और शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है. जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम की जांच के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि एंबुलेंस चालक के व्यवहार और पूरी परिस्थिति की जांच की जाएगी.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय रिश्वेश्वर ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है. एंबुलेंस चालक के व्यवहार और घटनाक्रम की जांच कराई जा रही है. जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.