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स्क्रिप्ट अगर अपनी भाषा में हो तो किरदार निभाना होता है ज्यादा असरदार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी

Nawazuddin Siddiqui Latest: हाल ही में एक बातचीत में, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने इस बात पर जोर दिया कि परिचित भाषा में स्क्रिप्ट होने से उसे याद रखना और संवाद बोलना आसान हो जाता है. उन्होंने यह भी माना कि अमिताभ बच्चन भी देवनागरी लिपि का इस्तेमाल करते हैं और वे खुद भी इसे पसंद करते हैं.

स्क्रिप्ट अगर अपनी भाषा में हो तो किरदार निभाना होता है ज्यादा असरदार- नवाजुद्दीन सिद्दीकी
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Nawazuddin Siddiqui Latest: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक माने जाते हैं, जो अपने काम के प्रति बेहतरीन समर्पण के लिए जाने जाते हैं. उनका सफर अभिनय के प्रति गहरे जुनून को दर्शाता है, जो उनके निभाए गए विभिन्न किरदारों में साफ दिखाई देता है. हर किरदार ने दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा है. पारंपरिक कास्टिंग और भाषा की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए, उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

संवाद बोलना आसान

हाल ही में एक बातचीत में, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने इस बात पर जोर दिया कि परिचित भाषा में स्क्रिप्ट होने से उसे याद रखना और संवाद बोलना आसान हो जाता है. उन्होंने यह भी माना कि अमिताभ बच्चन भी देवनागरी लिपि का इस्तेमाल करते हैं और वे खुद भी इसे पसंद करते हैं. नवाज ने कहा कि जिस भाषा में आप काम कर रहे हैं, आपकी स्क्रिप्ट भी उसी भाषा में होनी चाहिए. आपको उसी भाषा में बोलना भी चाहिए. अगर आपकी स्क्रिप्ट देवनागरी में दी जाती है, तो वह बहुत जल्दी याद हो जाती है, क्योंकि वह आपकी अपनी भाषा होती है. अगर आप महाराष्ट्र में किसी मराठी कलाकार को उसकी भाषा में स्क्रिप्ट देंगे, तो वह उसे बहुत जल्दी याद कर लेगा. लेकिन अगर स्क्रिप्ट रोमन में दी जाए, तो उसे याद रखना मुश्किल हो जाता है और उच्चारण भी सही नहीं होता. उच्चारण को लेकर काफी दिक्कतें आती हैं.

असुरक्षा महसूस होती थी

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने यह भी बताया कि पहले कलाकारों को अंग्रेजी न जानने को लेकर असुरक्षा महसूस होती थी, लेकिन अब यह सोच बदल गई है. अपने साथियों को अपनी भाषा में सफल होते देख उन्हें भी आत्मविश्वास मिला और आज कलाकार बिना किसी झिझक के अपनी भाषा में काम करते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में अगर आप फ्रेंच सिनेमा देखें, तो फ्रेंच लोग फ्रेंच में ही बोलते हैं. इटालियन लोग इटालियन बोलते हैं. जर्मन लोग जर्मन बोलते हैं. दक्षिण भारत के लोग कर्नाटक, तमिल, तेलुगू, मलयाली, सभी अपनी भाषा में बात करते हैं. शुरू में हमें डर लगता था कि हम अंग्रेजी नहीं बोल पाएंगे, लेकिन अब हम खुलकर अपनी भाषा में बोलते हैं.

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