सावन माह की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी ओंकारेश्वर शिवभक्ति के रंग में रंगी नजर आई. गुरुवार सुबह से ही बाबा ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे. रिमझिम बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. मंदिर परिसर में गूंज रहे "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया.
सुबह से ही लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
सावन के पहले दिन ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. मध्य प्रदेश के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए कतारों में नजर आए. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा.
बारिश भी नहीं डिगा सकी श्रद्धालुओं की आस्था
गुरुवार को क्षेत्र में रिमझिम बारिश का दौर जारी रहा, लेकिन इसका असर श्रद्धालुओं की आस्था पर नहीं पड़ा. लोग छाता और बारिश से बचाव के अन्य साधनों के साथ मंदिर पहुंचे और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की. बारिश के बीच मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखने लायक रहा.
श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर का पूजन किया. जलाभिषेक के साथ बेलपत्र, पुष्प, दूध और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया. भक्तों ने परिवार की खुशहाली, अच्छी सेहत और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की.
मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की विशेष व्यवस्था
सावन की शुरुआत के साथ बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं. श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराने के लिए सुरक्षा और मार्गदर्शन की व्यवस्था की गई, जिससे दर्शन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही और किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई.
सावन में और बढ़ेगी श्रद्धालुओं की संख्या
सावन माह शुरू होने के साथ ही ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने की उम्मीद है. विशेष रूप से सावन सोमवार, नाग पंचमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचेंगे. प्रशासन भी आने वाले दिनों की भीड़ को देखते हुए तैयारियों में जुटा हुआ है.
श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी करते हैं भगवान ओंकारेश्वर
पंडित सुधीर अत्रे के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है. उनका कहना है कि इस माह में श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए पूजन का विशेष महत्व होता है. ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन और पूजा करने आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भगवान शिव की कृपा से पूर्ण होती हैं. इसी विश्वास के साथ हर वर्ष लाखों भक्त सावन के दौरान यहां पहुंचते हैं.